आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध या अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोना-चांदी के दाम बढ़ते हैं। इतिहास में भी ऐसा कई बार हुआ है। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। ईरान से जुड़े तनाव के बावजूद सोना और चांदी दोनों में गिरावट देखने को मिल रही है, जिसने निवेशकों को हैरान कर दिया है।
डॉलर बना नया ‘सेफ हेवन’
इस बार सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना-चांदी महंगे लगने लगते हैं और उनकी मांग कम हो जाती है। अभी बड़े निवेशक सोने की बजाय डॉलर को सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं, जिससे गोल्ड की कीमतों पर दबाव आ रहा है।
सोना और डॉलर का उल्टा रिश्ता
इतिहास बताता है कि सोना और डॉलर हमेशा उल्टी दिशा में चलते हैं। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना गिरता है और जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना चढ़ता है। यही वजह है कि इस समय डॉलर की मजबूती सोने के दाम को नीचे खींच रही है।
ब्याज दरों का बड़ा असर
दूसरी बड़ी वजह बढ़ती ब्याज दरें हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना है। जब बैंक या बॉन्ड में ज्यादा ब्याज मिलने लगता है, तो निवेशक सोना छोड़कर वहां पैसा लगाना पसंद करते हैं, क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।
तेल की कीमतों का दबाव
होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। बड़े निवेशक अब तेल में भी पैसा लगा रहे हैं, क्योंकि उन्हें वहां ज्यादा रिटर्न की उम्मीद दिख रही है। इससे सोने-चांदी की मांग और कम हो रही है।
मुनाफावसूली भी एक कारण
पिछले कुछ समय में सोने के दाम काफी तेजी से बढ़े थे। ऐसे में कई बड़े निवेशकों ने मुनाफा कमाने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया है। जब बाजार में ज्यादा लोग बेचते हैं, तो कीमतें गिरना स्वाभाविक हो जाता है।
चांदी पर मंदी का असर
चांदी का बड़ा हिस्सा उद्योगों में इस्तेमाल होता है। अगर वैश्विक मंदी की आशंका बढ़ती है, तो उद्योगों की मांग घटती है और इसका असर सीधे चांदी की कीमत पर पड़ता है। यही वजह है कि चांदी सोने से ज्यादा तेजी से गिर रही है।
आगे क्या हो सकता है
फिलहाल बाजार पर डॉलर, ब्याज दर और तेल का दबाव ज्यादा है। लेकिन अगर हालात बदलते हैं और ब्याज दरें कम होती हैं या युद्ध लंबा चलता है, तो सोना फिर से चढ़ सकता है। लंबे समय में सोना अब भी सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन अभी बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है।