चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय रूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो इस साल 21 मार्च 2026 को है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान होता है, इसी वजह से उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का यह स्वरूप शांति और सौम्यता का प्रतीक है, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे अत्यंत वीर और पराक्रमी भी हो जाती हैं। उनकी आराधना से व्यक्ति के भीतर साहस और संतुलन का विकास होता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त समय
तीसरे दिन पूजा के लिए सुबह का समय बेहद शुभ माना गया है। पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:53 तक रहेगा, जो विशेष पूजा और साधना के लिए उत्तम है। इस समय में की गई पूजा से मन एकाग्र होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। माना जाता है कि सही मुहूर्त में मां का ध्यान करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
सरल पूजन विधि
पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या सुनहरे रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थान पर मां चंद्रघंटा की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। मां को लाल फूल, खासकर गुलाब अर्पित करें और दूध से बनी मिठाई, खीर या शहद का भोग लगाएं। पूजा के दौरान मंत्र जाप करें और अंत में आरती करके मां से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
आरती और भक्ति का महत्व
पूजा के अंत में मां की आरती करना बहुत जरूरी होता है। सुबह और शाम दोनों समय आरती करने से घर का वातावरण सकारात्मक बनता है। घंटे और शंख की ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन में शांति आती है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना व्यक्ति के आत्मविश्वास को मजबूत करती है और जीवन की बड़ी इच्छाओं को पूरा करने का मार्ग खोलती है।