Middle East तनाव के बीच रूस फिर बना भारत का बड़ा तेल सप्लायर, बदलती रणनीति ने बढ़ाई सप्लाई की रफ्तार

हाल के महीनों में भारत की तेल आयात रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। फरवरी में रूस से कच्चे तेल की खरीद में भारी गिरावट आई और यह करीब 32% घटकर लगभग 10 लाख बैरल प्रति दिन रह गई। यह आंकड़ा जून 2025 के पीक का लगभग आधा था। इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और लॉजिस्टिक कारण थे, जिससे भारत को वैकल्पिक सप्लायर तलाशने पड़े।

मिडिल ईस्ट से बढ़ी निर्भरता

रूस से आयात घटने के दौरान मिडिल ईस्ट के देशों ने इस कमी को पूरा किया। खासकर इराक भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा, जहां से आयात करीब 11.8 लाख बैरल प्रति दिन पहुंच गया। वहीं सऊदी अरब से भी लगभग 10 लाख बैरल प्रति दिन सप्लाई रही। इस दौरान भारत के कुल तेल आयात में मिडिल ईस्ट की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 59% तक पहुंच गई।

रूस की फिर मजबूत वापसी

अब एक बार फिर रूस से तेल सप्लाई तेजी से बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रूस से आयात बढ़कर करीब 18 लाख बैरल प्रति दिन हो गया है और मार्च में यह और बढ़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अब भी एक अहम पार्टनर बना हुआ है। बदलते हालात के बीच भारत संतुलन बनाते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटा है।

तनाव और नई रणनीति का असर

होर्मूज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े मुद्दों ने सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इसी कारण भारत अब अपनी तेल खरीद रणनीति में विविधता ला रहा है। ब्राजील से आयात बढ़ाकर उसे चौथा सबसे बड़ा सप्लायर बना दिया गया है। कुल मिलाकर भारत अब अलग-अलग देशों से संतुलित तरीके से तेल खरीदकर जोखिम को कम करने की कोशिश कर रहा है।

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Author: The Hindi Post