Dollar की मार से सोना-चांदी धड़ाम: मार्च में 4,400 रुपये सस्ता गोल्ड, सिल्वर 11,000 टूटा, दिल्ली बाजार में बड़ी गिरावट

देश की राजधानी दिल्ली में सोना और चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के मुताबिक चांदी के दाम 9,000 रुपये गिरकर 2,56,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए। वहीं 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 2,950 रुपये टूटकर 1,60,250 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। लगातार तीसरे दिन सोने में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।

मार्च में सोना-चांदी में भारी गिरावट

मार्च महीने में कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी कमजोरी देखने को मिली है। आंकड़ों के अनुसार इस महीने सोना अब तक करीब 4,400 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है। वहीं चांदी की कीमतों में भी 11,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। लगातार गिरते दामों ने बाजार में निवेशकों की धारणा को भी कमजोर किया है।

डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव

विश्लेषकों का कहना है कि सोना और चांदी की कीमतों पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी डॉलर की मजबूती से आया है। निवेशक अब सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड की ओर ज्यादा झुक रहे हैं। इसी वजह से कीमती धातुओं से पैसा निकलकर दूसरी संपत्तियों में जा रहा है, जिससे सोना-चांदी के दाम नीचे आ रहे हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव और महंगाई की चिंता

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी बाजार की दिशा प्रभावित की है। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। ऐसे माहौल में निवेशक ज्यादा सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं और इसका असर बुलियन मार्केट पर साफ दिखाई दे रहा है।

फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों की नजर अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक की अगली नीति बैठक पर है। उम्मीद की जा रही है कि फेडरल रिजर्व फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। अगर ऐसा होता है तो डॉलर मजबूत बना रह सकता है, जिससे सोना-चांदी की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

विदेशी बाजारों में भी कमजोर रुझान

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोना और चांदी कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे हैं। स्पॉट गोल्ड 5,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसलकर करीब 4,998 डॉलर के आसपास पहुंच गया। वहीं चांदी भी 80 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक या राजनीतिक हालात में बड़ा बदलाव नहीं होता, तब तक बुलियन की कीमतों में ज्यादा तेजी की उम्मीद कम है।

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Author: The Hindi Post