संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल चुका है। 15 दिनों से जारी इस संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट को हिला दिया है। जो देश सीधे युद्ध में शामिल हैं, उन्हें भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन दूर बैठे देश भी आर्थिक असर झेल रहे हैं। व्यापारिक मार्ग बाधित होने से वैश्विक बाजार में महंगाई का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
अमेरिका पर बढ़ता सैन्य और आर्थिक दबाव
संयुक्त राज्य अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपने युद्धपोत और मिसाइल डिफेंस सिस्टम सक्रिय रखने में करीब दो अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं। सैनिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई सैनिक हमलों और मानसिक तनाव से घायल हुए हैं। तेल की कीमतें बढ़ने और व्यापारिक मार्ग बाधित होने से अमेरिका में आयात महंगे हो गए हैं और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है।
इजराइल में भारी खर्च और जनजीवन ठप
इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर इजराइल पर देखा जा रहा है। देश ने आयरन डोम जैसी रक्षा प्रणालियों को चलाने में करीब 3.5 अरब डॉलर खर्च किए हैं। लगातार हमलों में कई सैनिक और नागरिक मारे गए हैं। कई शहरों में स्कूल और दफ्तर बंद हैं और लोग बंकरों में रहने को मजबूर हैं, जिससे पर्यटन और व्यापार भी ठप हो गया है।
ईरान को सैन्य और आर्थिक नुकसान
ईरान ने युद्ध में अपनी सैन्य ताकत जरूर दिखाई, लेकिन उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी है। कई सैन्य ठिकाने तबाह हो गए और युद्ध खर्च 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है। हमलों में अली खामेनेई समेत कई सैन्य अधिकारी और नागरिकों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं। तेल निर्यात में गिरावट से देश की अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ा है।
लेबनान और यमन में बढ़ता मानवीय संकट
लेबनान सीधे युद्ध में नहीं है, लेकिन हिजबुल्लाह और इजराइल की गोलाबारी से उसे भारी नुकसान हुआ है। बुनियादी ढांचे को सैकड़ों मिलियन डॉलर की क्षति हुई है। वहीं यमन में हौथी आंदोलन के हमलों से लाल सागर का व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुआ है, जिससे वहां मानवीय संकट और गहरा गया है।
खाड़ी देश और मिस्र की अर्थव्यवस्था पर असर
सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात ने सुरक्षा पर भारी खर्च बढ़ा दिया है। वहीं मिस्र को भी बड़ा नुकसान हुआ है। स्वेज नहर से होने वाली कमाई करीब 40 प्रतिशत घट गई है क्योंकि कई जहाज लाल सागर का रास्ता छोड़ रहे हैं। इससे पर्यटन और रोजगार पर भी संकट बढ़ गया है।