West Asia War से तेल में उबाल, लेकिन सोना शांत, निवेशक सोने नहीं, डॉलर की तरफ भागे

पश्चिम एशिया इस समय बड़े संघर्ष के मुहाने पर खड़ा है। 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच शुरू हुआ टकराव अब व्यापक युद्ध में बदलता नजर आ रहा है। आमतौर पर ऐसे संकट के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना खरीदते हैं। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। तनाव और युद्ध के माहौल के बावजूद सोने की कीमतें तेज़ी से नहीं बढ़ रही हैं और सीमित दायरे में ही घूम रही हैं।

परमाणु विवाद से भड़का संघर्ष

इस पूरे विवाद की जड़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका और इज़राइल लंबे समय से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान ईरान के अहम ठिकानों पर हमले हुए, जिनमें देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया और संघर्ष की आंच सऊदी अरब, लेबनान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात तक पहुंच गई।

तेल बाजार में जबरदस्त उछाल

इस संकट का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरे की वजह से दुनिया की तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। सप्लाई बाधित होने के डर से कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।

फिर भी क्यों शांत है सोना

आमतौर पर युद्ध और महंगाई के दौर में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन इस बार निवेशकों ने सोने की बजाय अमेरिकी डॉलर पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। संकट के समय डॉलर की मांग बढ़ गई, जिससे वह मजबूत हो गया। मजबूत डॉलर का सीधा असर सोने पर पड़ता है और उसकी कीमतों की रफ्तार धीमी हो जाती है।

ब्याज दरों ने भी रोकी सोने की रफ्तार

महंगाई बढ़ने के डर से फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रख सकते हैं। जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं और डॉलर मजबूत रहता है, तब सोने में निवेश कम आकर्षक हो जाता है। यही वजह है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सोना फिलहाल एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है।

आगे सोना बढ़ेगा या गिरेगा?

बाजार के जानकारों के मुताबिक, 2026 में सोने की दिशा तीन स्थितियों पर निर्भर करेगी। अगर युद्ध और वैश्विक मंदी बढ़ती है, तो सोना 15–20 प्रतिशत तक उछल सकता है। अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है और ब्याज दरों में थोड़ी कटौती होती है, तो 5–15 प्रतिशत तक बढ़त संभव है। वहीं अगर अमेरिका की अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है और ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो सोने में 5–20 प्रतिशत तक गिरावट भी आ सकती है।

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Author: The Hindi Post