1991 के संकट के बाद भारत में रणनीतिक तेल भंडार बनाने की चर्चा शुरू हुई। लेकिन इसकी योजना बनने में काफी समय लगा। आखिरकार 1998 में इस दिशा में कदम उठाया गया और बाद में सरकार ने एक अलग कंपनी बनाने का फैसला किया।
इस कंपनी को मिला जिम्मा
2004 में इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड यानी ISPRL नाम की कंपनी बनाई गई। इस कंपनी को देश में रणनीतिक तेल भंडार तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई। योजना थी कि ऐसे सुरक्षित स्थानों पर तेल रखा जाए जहां युद्ध या प्राकृतिक आपदा का खतरा कम हो।
चट्टानों के अंदर बने भंडार
इन भंडारों को सामान्य तेल डिपो की तरह जमीन पर नहीं बनाया गया। बल्कि मजबूत चट्टानों के अंदर विशाल गुफाओं में बनाया गया। इसका मकसद यह था कि अगर कभी हमला हो या कोई आपदा आए तो भी तेल सुरक्षित रहे। यह तरीका दुनिया के कई देशों में इस्तेमाल किया जाता है।
तीन जगह बनाए गए बड़े रिज़र्व
पहले चरण में तीन जगह भंडार बनाने का फैसला हुआ। इनमें विशाखापत्तनम में 1.33 मिलियन मीट्रिक टन, मंगलुरु में 1.5 मिलियन मीट्रिक टन और पादुर में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाए गए। इनका निर्माण 2008 में शुरू हुआ और 2015 से 2018 के बीच पूरा हो गया।