Holashtak 2026: मांगलिक काम भले बंद, लेकिन भक्ति का सबसे शक्तिशाली समय, ऐसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्न

होलाष्टक का समय होली से आठ दिन पहले शुरू होता है और इसे भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का विशेष काल माना जाता है। साल 2026 में यह 24 फरवरी से शुरू हो रहा है। भले ही इन दिनों विवाह या अन्य शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन पूजा-पाठ और भगवान की आराधना के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन दिनों भक्त प्रह्लाद ने गहन भक्ति के बल पर अपने कष्टों से मुक्ति पाई थी। इसलिए जो भी व्यक्ति श्रद्धा से पूजा करता है, उसे जीवन की बाधाओं से राहत मिलती है।

विष्णु सहस्रनाम और पाठ का प्रभाव

होलाष्टक में ग्रहों की उग्रता से बचने और मानसिक शांति पाने के लिए विशेष मंत्र और स्तोत्रों का पाठ बहुत प्रभावी माना जाता है। खासकर भगवान विष्णु के सहस्र नामों का स्मरण यानी विष्णु सहस्रनाम का पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है। इसके साथ नारायण कवच का पाठ परिवार के लिए आध्यात्मिक सुरक्षा कवच जैसा काम करता है। नियमित पाठ से मन शांत रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति के भीतर धैर्य व स्थिरता आती है। यह साधना भगवान से गहरा जुड़ाव बनाने का भी सरल मार्ग है।

महामंत्र जप से मानसिक शांति

होलाष्टक के आठ दिनों में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह मंत्र मानसिक अशांति को कम करता है और मन को स्थिर बनाता है। रोज कम से कम एक माला जप करने से मन की चंचलता घटती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। तुलसी की माला से जप करना विशेष रूप से शुभ माना गया है। यह सरल साधना व्यक्ति के अंतर्मन को शुद्ध करती है और कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने की शक्ति देती है।

तुलसी पूजन और भोग अर्पण विधि

होलाष्टक में तुलसी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। प्रतिदिन शाम को तुलसी के पास घी का दीपक जलाना और परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। साथ ही भगवान को माखन-मिश्री, पीले फल या केसर की खीर का भोग अर्पित करना लाभकारी होता है। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करना चाहिए। यह सात्विक पूजा घर के वातावरण को पवित्र बनाती है और परिवार में प्रेम व शांति बढ़ाती है। नियमित पूजा से जीवन में सकारात्मकता और ईश्वरीय कृपा का अनुभव होता है।

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Author: The Hindi Post