यूरिन में खून आना, जिसे मेडिकल भाषा में हीमेट्यूरिया कहा जाता है, शरीर का एक अहम चेतावनी संकेत है। अगर दो–तीन दिन से लगातार पेशाब में खून दिखाई दे रहा है तो इसे हल्के में बिल्कुल न लें। इसके पीछे सबसे आम कारण किडनी, यूरिनरी ट्रैक्ट या ब्लैडर से जुड़ी समस्याएं होती हैं। कई बार पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या भूरे रंग का दिख सकता है। कुछ मामलों में खून आंखों से नजर नहीं आता, लेकिन जांच में पता चलता है। यह किडनी की शुरुआती बीमारी का संकेत भी हो सकता है, इसलिए समय पर जांच जरूरी है।
इंफेक्शन या किडनी स्टोन हो सकता कारण
अगर एक-दो बार पेशाब में खून आया है तो यह हल्का यूरिन इंफेक्शन हो सकता है। बैक्टीरियल संक्रमण के कारण ब्लैडर के आसपास सूजन हो जाती है, जिससे पेशाब में जलन और खून दिख सकता है। लेकिन अगर यह समस्या बार-बार हो रही है तो किडनी स्टोन यानी पथरी की आशंका बढ़ जाती है। पथरी किडनी से पेशाब की नली तक जाते समय अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। इसके साथ तेज दर्द, कमर में खिंचाव या बार-बार पेशाब आना जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
कब समझें मामला गंभीर है
सफदरजंग अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. हिमांशु वर्मा के अनुसार, अगर बार-बार पेशाब में खून आ रहा है तो यह किडनी ट्यूमर या ब्लैडर ट्यूमर का संकेत भी हो सकता है। अगर खून के साथ तेज दर्द, पेशाब में जलन, कमर या पेट के निचले हिस्से में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। कई मरीज शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी आगे बढ़ जाती है। समय पर जांच और इलाज से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
बचाव और जरूरी सावधानियां
इस समस्या से बचाव के लिए रोज कम से कम 2 लीटर पानी जरूर पिएं, ताकि शरीर से टॉक्सिन बाहर निकलते रहें। ज्यादा नमक का सेवन कम करें, क्योंकि इससे पथरी बनने का खतरा बढ़ता है। अगर पेशाब में जलन या दर्द हो तो खुद से दवा न लें, तुरंत डॉक्टर से सलाह करें। साथ ही डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें, क्योंकि ये दोनों किडनी पर सीधा असर डालते हैं। याद रखें, पेशाब में खून आना छोटा लक्षण नहीं है- समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव है।