India का आतंक पर सबसे बड़ा वार! नई एंटी-टेरर पॉलिसी PRAHAAR से ड्रोन, साइबर और सीमा पार हमलों पर कड़ा प्रहार

भारत सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए पहली व्यापक एंटी-टेरर रणनीति PRAHAAR जारी की है। इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तैयार किया है। इस नीति में सीमा पार आतंकवाद, साइबर हमले, ड्रोन और नई टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग से निपटने के ठोस उपाय बताए गए हैं। इसका मकसद जमीन, पानी और हवा तीनों स्तर पर सुरक्षा को मजबूत करना है।

आतंक को धर्म से नहीं जोड़ता भारत

रणनीति में साफ कहा गया है कि भारत आतंकवाद को किसी धर्म, जाति या राष्ट्रीयता से नहीं जोड़ता। देश कई दशकों से आतंकवाद से लड़ रहा है और उसकी नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ पर आधारित है। ऊर्जा, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु जैसे अहम क्षेत्रों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।

सीमा पार आतंकवाद पर फोकस

पॉलिसी में सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद को सबसे बड़ी चुनौती बताया गया है। इसमें अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया जैसे संगठनों का जिक्र है, जो स्लीपर सेल और स्थानीय नेटवर्क के जरिए हमलों की कोशिश करते रहे हैं। विदेश से बैठे हैंडलर स्थानीय सहयोग लेकर साजिश रचते हैं।

ड्रोन और टेक्नोलॉजी का खतरा

रणनीति में खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में ड्रोन के इस्तेमाल पर चिंता जताई गई है। आतंकवादी सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड ऐप, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट के जरिए फंडिंग और प्रचार कर रहे हैं। साथ ही केमिकल, बायोलॉजिकल और डिजिटल हथियारों तक पहुंच की कोशिश भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बताई गई है।

रोकथाम और त्वरित कार्रवाई योजना

पॉलिसी में इंटेलिजेंस आधारित रोकथाम, एजेंसियों के बीच रियल टाइम जानकारी साझा करने और आतंक फंडिंग पर कार्रवाई पर जोर है। बड़ी घटनाओं में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की तैनाती और जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी की भूमिका अहम बताई गई है। स्थानीय पुलिस को पहली प्रतिक्रिया बल माना गया है।

कानूनी ढांचा और मानवाधिकार

रणनीति में जांच से लेकर अदालत तक कानूनी विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है, ताकि मामलों में सजा सुनिश्चित हो सके। साथ ही कानून लागू करते समय मानवाधिकारों की रक्षा पर भी जोर दिया गया है। बहु-स्तरीय कानूनी व्यवस्था के तहत मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट तक हो सकती है।

कट्टरपंथ रोकने की पहल

युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने के लिए डी-रेडिकलाइजेशन प्रोग्राम शुरू करने का प्रस्ताव है। समुदाय और धार्मिक नेताओं को जागरूकता अभियान में शामिल करने की बात कही गई है। जेलों में भी उग्रवाद रोकने के उपाय लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि भर्ती और कट्टरपंथ की प्रक्रिया कमजोर हो सके।

वैश्विक सहयोग और आगे की रणनीति

नीति अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी अहम मानती है। आतंकियों को वैश्विक स्तर पर सूचीबद्ध कराने और सहयोग बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सहित कई मंचों पर सक्रिय भूमिका की बात कही गई है। आगे एजेंसियों के बेहतर समन्वय, तकनीकी निवेश और राज्यों की एंटी-टेरर क्षमता बढ़ाने पर जोर रहेगा।

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Author: The Hindi Post