ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने जिस चीनी जे-10सीई फाइटर जेट की खूब तारीफ की थी, वही जेट रियाद एयर डिफेंस शो में खास प्रभाव नहीं छोड़ पाया. न तो किसी देश ने इसे खरीदने में रुचि दिखाई और न ही चीन ने इसका हवाई प्रदर्शन किया. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस शो में दक्षिण कोरिया और तुर्की के नए फाइटर जेट ज्यादा चर्चा में रहे. जे-10सीई चेंगदू सीरीज का 4.5 जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट माना जाता है, लेकिन इस बार इसकी मौजूदगी फीकी नजर आई.
खरीददार नहीं मिले, उठे बड़े सवाल
रिपोर्ट के अनुसार मिडिल ईस्ट के किसी भी देश ने जे-10सीई खरीदने की पहल नहीं की. इतना ही नहीं, पाकिस्तान के जेएफ-17 थंडर को भी कोई ग्राहक नहीं मिला. यह वही जेट हैं, जिनके बारे में पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बड़े दावे किए थे. सबसे बड़ी बात यह है कि जे-10सीई को अपेक्षाकृत सस्ता फाइटर जेट माना जाता है. इसके बावजूद यूरोप और मध्य-पूर्व के देशों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई. इससे यह सवाल उठने लगा कि आखिर सस्ता होने के बावजूद यह जेट बाजार में लोकप्रिय क्यों नहीं हो पा रहा है.
अमेरिका, तकनीक और भरोसे का असर
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई वजहें हैं. पहला, कई देश चीन से हथियार खरीदकर अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहते, क्योंकि वे उसके सहयोगी हैं. दूसरा, अब बाजार में 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट मौजूद हैं, जबकि जे-10सीई 4.5 जेनरेशन का है. तीसरा, दक्षिण कोरिया के केएफ और तुर्की के कान जैसे नए फाइटर जेट ज्यादा आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इसके अलावा चीनी हथियारों की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर भी कई देशों में भरोसे की कमी बताई जाती है.
चीन का दावा और पाकिस्तान कनेक्शन
चीन का कहना है कि जे-10सीई एक ऑल-वेदर फाइटर जेट है, जिसे एक ही पायलट उड़ाता है और यह आधुनिक तकनीक से लैस है. इस मॉडल ने पहली उड़ान 1998 में भरी थी और पाकिस्तान ने इसे 2021 के आसपास खरीदा था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारतीय राफेल जेट पाकिस्तान सीमा में सक्रिय हुए, तब इस्लामाबाद ने इसी जेट को तैनात किया था. हालांकि रियाद शो में इसकी कमजोर प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग पर नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं.