Chinese manjha से मौतों पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब, रोकथाम के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने निर्देश जारी

उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे से हो रही मौतों और गंभीर चोटों के मामलों पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि प्रशासन हर बार घटना के बाद ही क्यों सक्रिय होता है, जबकि इन हादसों को पहले ही रोका जा सकता है। कोर्ट ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि प्रदेश में चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक कैसे लगाई जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि इस समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि यह सीधे लोगों की जान से जुड़ा मामला है।

सरकार को जागरूकता और सख्ती के निर्देश

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि खतरनाक मांझे के प्रति बच्चों और अभिभावकों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर सख्ती से प्रतिबंध लागू किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि मांझे से घायल या प्रभावित लोगों को चिकित्सा सुविधा और मुआवजा देने पर भी सरकार गंभीरता से विचार करे। उद्देश्य यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति पूरी तरह रोकी जा सके।

ठोस कार्ययोजना बनाने का आदेश

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से ठोस और स्थायी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश अधिवक्ता मोतीलाल यादव द्वारा 2018 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में प्रदेश में चाइनीज मांझे पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रतिबंध लागू करने के लिए आदेश जारी किए जा चुके हैं। कोर्ट ने इस पर विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है और अगली सुनवाई 11 मार्च को तय की गई है।

हालिया घटनाओं पर कोर्ट की चिंता

याचिकाकर्ता ने हाल में सामने आई घटनाओं का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि कई लोग चाइनीज मांझे से गंभीर रूप से घायल हुए हैं और कुछ की जान भी जा चुकी है। इन मामलों को देखते हुए कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर प्रशासन हर बार हादसे के बाद ही क्यों सक्रिय होता है। न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देना सरकार की जिम्मेदारी है और इसे लेकर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra