कहते हैं कि इंसान की हथेली में उसका भूत, वर्तमान और भविष्य छिपा होता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हाथ की रेखाएं केवल भाग्य ही नहीं बल्कि व्यक्ति के स्वभाव, सोच और जीवन में मिलने वाली दैवीय कृपा के संकेत भी देती हैं। आम व्यक्ति इन रेखाओं को पढ़ नहीं पाता, लेकिन जानकार हस्तरेखा विशेषज्ञ हथेली पर बने चिन्हों के माध्यम से जीवन से जुड़ी कई अहम बातें बता सकते हैं। शास्त्रों में यह भी माना गया है कि हथेली पर कुछ विशेष निशान भगवान शिव से जुड़े होते हैं, जो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा का संकेत देते हैं।
हथेली पर त्रिशूल का चिह्न
त्रिशूल भगवान शिव का प्रमुख अस्त्र है और शक्ति व संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की हथेली पर स्पष्ट रूप से त्रिशूल का निशान बनता है, वे जन्म से ही भाग्यशाली होते हैं। यदि यह निशान भाग्य रेखा या मस्तिष्क रेखा के सिरे पर हो, तो इसकी शुभता और भी बढ़ जाती है। ऐसे लोगों पर महादेव की विशेष कृपा मानी जाती है। जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां आएं, ये लोग हार नहीं मानते और संघर्ष से निकलकर सफलता की राह बनाते हैं।
हथेली पर डमरू का दुर्लभ संकेत
हथेली पर डमरू का निशान बहुत ही दुर्लभ और अत्यंत शुभ माना गया है। यह महादेव की विशेष कृपा का प्रतीक होता है। शास्त्रों के अनुसार, यदि यह चिह्न गुरु पर्वत पर स्थित हो, तो व्यक्ति को राजयोग के समान फल प्राप्त होते हैं। ऐसे लोग समाज में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और प्रभावशाली स्थान प्राप्त करते हैं। इनके जीवन में आने वाली बड़ी बाधाएं स्वतः दूर हो जाती हैं। माना जाता है कि भगवान शिव ऐसे लोगों को कठिन समय में विशेष संरक्षण प्रदान करते हैं।
अर्धचंद्र और ध्वज का योग
कुछ लोगों की हथेलियों को जोड़ने पर अर्धचंद्र जैसा निशान बनता है। ऐसे लोग कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोते और नेतृत्व क्षमता से भरपूर होते हैं। वहीं, जिनकी हथेली पर ध्वज या झंडे का निशान बनता है, उन्हें शनि देव और भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त होती है। ऐसे व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत होते हैं और समाज में प्रसिद्धि हासिल करते हैं। इनके निर्णय स्पष्ट होते हैं और जीवन में स्थायित्व बना रहता है।