Mahadev के सबसे निकट होने पर भी दूर क्यों रहते हैं भक्त, छह ज्योतिर्लिंगों से जुड़ा रहस्यमय आध्यात्मिक नियम

सनातन धर्म में भगवान शिव को देवों के देव और परम ईश्वर के रूप में पूजा जाता है। वह कैलाशपति भी हैं और श्मशानवासी भी, जो सुखी और दुखी सभी की प्रार्थनाएं समान भाव से स्वीकार करते हैं। शिव को मानवता के सबसे निकट देवता माना जाता है, फिर भी भारत के कुछ प्रमुख ज्योतिर्लिंग ऐसे हैं जहां भक्तों को उन्हें छूने की अनुमति नहीं है। यह नियम अक्सर लोगों के मन में सवाल पैदा करता है। मान्यता है कि यह केवल प्रतिबंध नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक परंपराओं और ऊर्जा संतुलन से जुड़ा विषय है।

काशी और रामेश्वरम की मान्यताएं

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग को मोक्ष की नगरी का केंद्र माना जाता है। यहां भगवान शिव को परम सत्य के रूप में पूजा जाता है। भक्त दर्शन करते हैं, लेकिन ज्योतिर्लिंग को सीधे स्पर्श नहीं कर सकते। इसके पीछे एक कारण भारी भीड़ प्रबंधन है, वहीं दूसरी ओर यह मान्यता भी है कि गर्भगृह अत्यंत शक्तिशाली आध्यात्मिक क्षेत्र है, जहां शारीरिक स्पर्श से अधिक मानसिक और भावनात्मक समर्पण को महत्व दिया जाता है। रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग भी रामायण से जुड़ा अत्यंत पावन स्थल है। यहां जल अनुष्ठानों का विशेष महत्व है और ज्योतिर्लिंग को छूने की परंपरा नहीं है।

केदारनाथ और सोमनाथ का नियम

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय की ऊंचाइयों में स्थित है और इसे अत्यंत ऊर्जावान तीर्थ माना जाता है। यहां ज्योतिर्लिंग को केवल पुजारी ही स्पर्श कर सकते हैं। मान्यता है कि यह केवल प्रतीक नहीं, बल्कि जीवंत आध्यात्मिक शक्ति का स्वरूप है। वहीं सोमनाथ को पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। इस मंदिर में शास्त्रीय आगमिक परंपराओं का पालन किया जाता है, जहां पूजा और दर्शन पुजारी के माध्यम से होते हैं और भक्तों को ज्योतिर्लिंग छूने की अनुमति नहीं दी जाती।

महाकालेश्वर और वैद्यनाथ का महत्व

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग दक्षिणमुखी है और इसका संबंध समय तथा विनाश से जोड़ा जाता है। यहां विशेषकर सुबह के अनुष्ठानों में भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इसलिए मंदिर प्रशासन और पुरोहित वर्ग द्वारा स्पर्श से जुड़ा नियम सख्ती से लागू किया जाता है। वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को भी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यहां भी ज्योतिर्लिंग के साथ शारीरिक संपर्क सीमित रखा गया है। मान्यता है कि इन स्थलों पर शिव को स्पर्श करने से अधिक जरूरी है श्रद्धा, संयम और आंतरिक समर्पण।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra