आज के समय में गेमिंग बच्चों से लेकर बड़ों तक की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है. मोबाइल, लैपटॉप और कंसोल पर घंटों गेम खेलना अब आम बात है. आधुनिक वीडियो गेम इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि खिलाड़ी लंबे समय तक उनसे जुड़ा रहे. रंगीन ग्राफिक्स, रोमांचक साउंड, लेवल सिस्टम और रिवॉर्ड दिमाग को लगातार एक्टिव रखते हैं. वैज्ञानिक बताते हैं कि गेमिंग के दौरान दिमाग के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं, खासकर वे हिस्से जो भावनाओं, फैसले लेने और इनाम से जुड़े होते हैं. यही वजह है कि गेम खेलते समय व्यक्ति पूरी तरह उसमें डूब जाता है.
डोपामिन से जुड़ी लत की शुरुआत
गेमिंग के दौरान सबसे ज्यादा असर डोपामिन नाम के हार्मोन का होता है. इसे फील गुड हार्मोन कहा जाता है. जब कोई खिलाड़ी लेवल पूरा करता है, जीत हासिल करता है या रिवॉर्ड पाता है, तो दिमाग डोपामिन रिलीज करता है. इससे खुशी और संतुष्टि महसूस होती है. लेकिन अगर गेमिंग ज्यादा समय तक चलती रहे तो दिमाग जरूरत से ज्यादा डोपामिन रिलीज करने लगता है. धीरे-धीरे दिमाग इस हार्मोन का आदी हो जाता है और वही खुशी पाने के लिए और ज्यादा गेम खेलने की जरूरत महसूस होती है. इसका नतीजा थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और ब्रेन फॉग के रूप में सामने आता है.
फाइट फ्लाइट मोड और तनाव
एक्शन और फाइटिंग गेम्स खेलते समय शरीर का फाइट या फ्लाइट रिस्पॉन्स एक्टिव हो सकता है. यह वही सिस्टम है जो खतरे की स्थिति में शरीर को सतर्क करता है. कई बार दिमाग गेम को असली खतरे की तरह लेने लगता है, जिससे गुस्सा, बेचैनी और आक्रामक व्यवहार बढ़ सकता है. इस दौरान एड्रेनालिन हार्मोन रिलीज होता है, जिससे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. इसके साथ ही कोर्टिसोल नाम का स्ट्रेस हार्मोन भी एक्टिव हो सकता है. लंबे समय तक कोर्टिसोल बढ़ा रहने से नींद की परेशानी, मूड खराब होना और तनाव बढ़ने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
संतुलन में गेमिंग के फायदे
वैज्ञानिक मानते हैं कि गेमिंग पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है. अगर इसे सीमित समय और संतुलन के साथ किया जाए तो इसके फायदे भी सामने आते हैं. रिसर्च के अनुसार, सही मात्रा में गेम खेलने से फोकस बढ़ता है, याददाश्त मजबूत होती है और समस्या सुलझाने की क्षमता बेहतर होती है. कुछ गेम्स रणनीतिक सोच और रचनात्मकता को भी बढ़ावा देते हैं. असली समस्या तब शुरू होती है जब गेमिंग जरूरत से ज्यादा हो जाए और दिनचर्या पर हावी हो जाए. संतुलित गेमिंग दिमाग और शरीर दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है.