सिरदर्द एक आम समस्या है, जिससे लगभग हर व्यक्ति कभी न कभी परेशान होता है. अक्सर लोग इसे सामान्य समझकर दर्द की गोली खा लेते हैं या थोड़ा आराम कर लेते हैं. लेकिन जब सिरदर्द बार-बार होने लगे, तेज हो जाए या रोजमर्रा के कामों में रुकावट डालने लगे, तो यह किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है. कई मामलों में यही सिरदर्द माइग्रेन का रूप ले लेता है, जो एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी मानी जाती है. समय पर पहचान न होने पर दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है.
माइग्रेन और नॉर्मल सिरदर्द में अंतर
लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, माइग्रेन और सामान्य सिरदर्द में सबसे बड़ा अंतर दर्द की प्रकृति में होता है. नॉर्मल सिरदर्द आमतौर पर हल्का या मध्यम होता है और पूरे सिर में दबाव जैसा महसूस होता है. यह तनाव, थकान, नींद की कमी या स्क्रीन टाइम के कारण हो सकता है. वहीं माइग्रेन का दर्द अक्सर सिर के एक तरफ तेज, धड़कन जैसा होता है और इसके साथ मतली, उलटी, रोशनी व आवाज से परेशानी भी हो सकती है.
माइग्रेन से बचाव कैसे करें
माइग्रेन से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव बेहद जरूरी है. रोज़ाना पूरी नींद लें और सोने-जागने का समय तय रखें. तेज रोशनी, तेज आवाज और ज्यादा मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल से बचें. तनाव माइग्रेन को बढ़ा सकता है, इसलिए योग, ध्यान और गहरी सांस लेने की आदत डालें. लंबे समय तक भूखे न रहें और संतुलित भोजन करें. ज्यादा कैफीन, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम करें. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सही दवा लें.
सामान्य सिरदर्द से बचाव के उपाय
सामान्य सिरदर्द से बचने के लिए रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना जरूरी है. पर्याप्त पानी पिएं, क्योंकि डिहाइड्रेशन सिरदर्द की बड़ी वजह बनता है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचें और बीच-बीच में आंखों को आराम दें. सही पोजिशन में बैठें ताकि गर्दन और कंधों पर दबाव न पड़े. हल्की एक्सरसाइज, समय पर भोजन और अच्छी नींद सिरदर्द से बचाव में मदद करती है. अगर सिरदर्द लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें.