राकेश ओमप्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी रंग दे बसंती भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल है, जिसने सोच, सिनेमा और समाज को एक साथ झकझोर दिया। आमिर खान, आर. माधवन, सिद्धार्थ सूर्यनारायण, सोहा अली खान, शरमन जोशी, कुणाल कपूर, अनुपम खेर और अतुल कुलकर्णी जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म अपनी रिलीज़ के साथ ही एक फेनोमेना बन गई थी। बेखौफ कहानी, दमदार संवाद और देशभक्ति की नई परिभाषा ने इसे युवाओं की आवाज़ बना दिया।
26 जनवरी 2006 से 20 साल का सफर
रंग दे बसंती 26 जनवरी 2006 को रिपब्लिक डे के मौके पर रिलीज़ हुई थी और अब इस ऐतिहासिक दिन पर फिल्म ने अपने थिएट्रिकल सफर के 20 साल पूरे कर लिए हैं। दो दशकों बाद भी फिल्म की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। भ्रष्टाचार, सिस्टम से टकराव और बदलाव की चाह जैसे मुद्दे आज भी उतने ही असरदार लगते हैं। यही वजह है कि यह फिल्म आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है।
30 जनवरी को होगी स्पेशल स्क्रीनिंग
इस खास उपलब्धि को सेलिब्रेट करने के लिए मेकर्स ने फिल्म की कास्ट और क्रू के लिए एक स्पेशल स्क्रीनिंग का आयोजन किया है। यह स्क्रीनिंग 30 जनवरी को मुंबई में होगी। इस मौके पर डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ आमिर खान, सिद्धार्थ सूर्यनारायण, सोहा अली खान, कुणाल कपूर और अतुल कुलकर्णी मौजूद रहेंगे। यह इवेंट पूरी टीम के लिए भावनात्मक और यादों से भरा होने वाला है।
कहानी जिसने सोच बदल दी
फिल्म की कहानी कुछ बेफिक्र युवाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी ज़िंदगी आज़ादी के क्रांतिकारियों पर डॉक्यूमेंट्री बनाते हुए पूरी तरह बदल जाती है। जब वे भगत सिंह और उनके साथियों की भूमिका में उतरते हैं, तो उन्हें समाज में फैले भ्रष्टाचार और अन्याय का असली चेहरा दिखता है। इसके बाद लिया गया उनका फैसला उनकी ज़िंदगी की दिशा ही बदल देता है। इसी बेबाक सोच और साहसिक संदेश के कारण रंग दे बसंती आज भी एक सच्ची कल्ट क्लासिक बनी हुई है।