Maharashtra की राजनीति का बड़ा अध्याय खत्म, अजित पवार के उतार-चढ़ाव भरे सफर पर लगा विराम

महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता अजित पवार का 66 वर्ष की उम्र में बुधवार को एक प्लेन हादसे में निधन हो गया। बीते 13 वर्षों में वह छह बार उप मुख्यमंत्री बने और सबसे लंबे समय तक गैर-लगातार डिप्टी सीएम रहने का रिकॉर्ड भी उनके नाम रहा। दिसंबर 2024 से वह देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे के साथ राज्य के 8वें उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे। उनका जाना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

उप मुख्यमंत्री पद का ऐतिहासिक सफर

अजित पवार ने पहली बार 10 नवंबर 2010 को उप मुख्यमंत्री पद संभाला था। इसके बाद अलग-अलग सरकारों में उन्होंने कुल छह बार यह जिम्मेदारी निभाई। 23 नवंबर 2019 को देवेंद्र फडणवीस के साथ बनी सरकार महज 80 घंटे में गिर गई, जिसने राज्य की राजनीति को हिला दिया। बावजूद इसके, अजित पवार हर राजनीतिक भूचाल के बाद फिर सत्ता के केंद्र में लौटे।

शुरुआती जीवन और राजनीतिक प्रवेश

अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर में हुआ था। वह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे थे। ‘दादा’ के नाम से मशहूर अजित पवार ने 20 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखा। उनकी शिक्षा माध्यमिक स्तर तक रही, लेकिन राजनीतिक समझ और संगठन क्षमता ने उन्हें जल्दी ही पहचान दिला दी।

बारामती से सत्ता तक का सफर

1991 में अजित पवार बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी। उसी साल वह विधायक बने और बारामती विधानसभा सीट से लगातार आठ बार जीत दर्ज की। उन्होंने कृषि, बिजली, जल संसाधन और बागवानी जैसे अहम विभागों का नेतृत्व किया और कृष्णा घाटी व कोकण सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली।

विवाद, इस्तीफा और वापसी

2013 में सिंचाई घोटाले के आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा, जिससे राज्य की राजनीति गरमा गई। हालांकि, बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली और वह 72 दिन में ही दोबारा डिप्टी सीएम बने। तीखे बयानों, भ्रष्टाचार के आरोपों और लवासा प्रोजेक्ट जैसे विवादों के बावजूद उनका राजनीतिक कद बना रहा।

दादा की राजनीतिक विरासत

44 साल के राजनीतिक करियर में अजित पवार एक मजबूत संगठनकर्ता और प्रभावशाली नेता के रूप में पहचाने गए। चाचा शरद पवार से मतभेदों के बावजूद उन्होंने खुद को उनका अनुयायी बताया। सत्ता में बार-बार वापसी करने की उनकी क्षमता ने उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति का अहम चेहरा बना दिया। उनके निधन के साथ एक युग का अंत हो गया।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra