Ajit Pawar के विमान हादसे ने दहलाया देश, क्या तकनीकी चूक बनी काल या मौसम ने बिगाड़ा खेल?

महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान लैंडिंग के समय क्रैश हो गया। DGCA और शुरुआती जांच के अनुसार, इस दुर्घटना में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि पायलट ने संकरे रनवे पर लैंडिंग की अनुमति मांगी थी, लेकिन विमान का अगला हिस्सा (Nose) जमीन से टकरा गया। दिल्ली से AAIB की टीम अब इस गहरे सस्पेंस से पर्दा उठाएगी कि क्या यह महज एक तकनीकी खराबी थी या कोई बड़ी चूक।

टेकऑफ और लैंडिंग: मौत का सबसे खतरनाक जोन

एविएशन एक्सपर्ट्स की मानें तो विमान की उड़ान में सबसे ज्यादा जोखिम टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान होता है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2023 में हुई 109 बड़ी दुर्घटनाओं में से 67 हादसे इन्हीं दो चरणों में हुए। अक्सर इन महत्वपूर्ण क्षणों में इंजन फेल होना या तकनीकी खराबी जानलेवा साबित होती है। पिछले 7 वर्षों में दुनिया भर में औसतन 200 विमान हादसे हर साल हुए हैं, जो यह बताते हैं कि आसमान की यात्रा में जमीन के करीब रहना सबसे चुनौतीपूर्ण है।

पायलट की सूझबूझ और मौसम का जानलेवा कॉकटेल

किसी भी सुरक्षित उड़ान के लिए पायलट की ट्रेनिंग और मानसिक सतर्कता सबसे अहम है, लेकिन ‘ह्यूमन एरर’ हादसों की एक बड़ी वजह बनी हुई है। खराब मौसम, बादलों के बीच विजुअल भ्रम और सटीक अनुमान न लगा पाना कई बार विमान को तबाही की ओर ले जाता है। विमान को ‘विजुअल’ या ‘इंस्ट्रूमेंट’ फ्लाइट रूल्स के तहत उड़ाना पड़ता है; यहाँ एक छोटी सी गलती या एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की ओर से मिली गलत जानकारी हवा में उड़ते महल को मलबे में बदल सकती है।

बर्ड स्ट्राइक और आंकड़ों की डरावनी तस्वीर

विमान हादसों के पीछे एक अदृश्य दुश्मन ‘पक्षी’ भी हैं। वेबसाइट ‘ट्रैवल रडार’ के मुताबिक, दुनिया भर में रोजाना करीब 150 बर्ड स्ट्राइक के मामले होते हैं, जिनमें से कई रिपोर्ट ही नहीं हो पाते। 2017 से 2023 के बीच वैश्विक स्तर पर 813 प्लेन क्रैश हुए, जिनमें 1,473 लोगों ने अपनी जान गंवाई। भारत में भी पिछले सात सालों में 14 ऐसे हादसे दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि एविएशन सेफ्टी में अभी कई तकनीकी और सुरक्षात्मक सुधारों की सख्त जरूरत है।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra