चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं. आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को साफ कहा है कि SIR प्रक्रिया से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया जा सकता. आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को जारी पत्र का हवाला देते हुए कहा कि SIR की अवधि के दौरान प्रशासनिक स्थिरता बेहद जरूरी है. इसी कारण आयोग की मंजूरी के बिना किसी भी स्तर पर ट्रांसफर आदेश मान्य नहीं होंगे.
किन अफसरों के ट्रांसफर पर आपत्ति
चुनाव आयोग के संज्ञान में आया कि बंगाल सरकार ने 1 दिसंबर 2025, 20 जनवरी 2026 और 21 जनवरी 2026 को तीन IAS अधिकारियों के ट्रांसफर आदेश जारी किए. इनमें अश्विनी कुमार यादव, रणधीर कुमार और स्मिता पांडे शामिल हैं, जो अलग-अलग जिलों में चुनावी रोल पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी निभा रहे थे. आयोग ने स्पष्ट कहा कि ये ट्रांसफर उसके निर्देशों का उल्लंघन हैं, क्योंकि इससे पहले आयोग की सहमति नहीं ली गई. इसी आधार पर आयोग ने राज्य सरकार को इन सभी ट्रांसफर आदेशों को तुरंत रद्द करने का निर्देश दिया है.
आयोग ने दी चेतावनी और याद दिलाई नियुक्तियां
चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि 28 नवंबर 2025 को उसने 12 मतदाता सूची पर्यवेक्षकों और 5 संभागीय आयुक्तों की नियुक्ति की थी. ये सभी अधिकारी SIR प्रक्रिया के लिए सीधे आयोग में प्रतिनियुक्ति पर हैं. आयोग ने बंगाल सरकार को भविष्य के लिए चेताया कि SIR से जुड़े किसी भी अधिकारी के संबंध में आदेश जारी करने से पहले आयोग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा. आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है.
SIR के खिलाफ ममता का दिल्ली मार्च
इस बीच SIR के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का विरोध और तेज होता दिख रहा है. बंगाल में SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने के बाद अब ममता दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय के सामने धरना देने की तैयारी में हैं. वह बुधवार को सिंगूर में रैली में हिस्सा लेंगी और इसके बाद शाम को दिल्ली रवाना होंगी. ममता का आरोप है कि SIR के जरिए राज्य में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है. आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने के आसार हैं.