बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) एक ऐसे फैसले की तैयारी कर रही है, जिसने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. समिति का प्रस्ताव है कि केदारनाथ, बदरीनाथ समेत उसके अधीन आने वाले 48 मंदिरों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए. इस फैसले के पीछे समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी हैं, जिन्होंने साफ कहा है कि सभी धामों और मंदिरों में गैर हिंदुओं की एंट्री बंद करने का ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है. जैसे ही यह बात सामने आई, सोशल मीडिया से लेकर विपक्षी दलों तक तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई.
धर्म परीक्षण और पहचान का सवाल
इस प्रस्ताव ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह नियम लागू होता है, तो गैर हिंदुओं की पहचान कैसे की जाएगी? क्या श्रद्धालुओं को रोककर उनका धर्म पूछा जाएगा या कोई पहचान पत्र दिखाना होगा? क्या कपड़ों या नाम के आधार पर धर्म तय किया जाएगा? इन सवालों का फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब नहीं है. इसी वजह से इसे लेकर भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ रही हैं. आलोचकों का कहना है कि ऐसा कदम व्यावहारिक से ज्यादा वैचारिक लगता है और इससे भेदभाव की आशंका पैदा होती है.
चारधाम आस्था या अधिकार का मुद्दा
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का तर्क है कि चारधाम पर्यटन स्थल नहीं बल्कि आस्था और साधना के केंद्र हैं. उनके अनुसार, मंदिर में प्रवेश कोई नागरिक अधिकार नहीं बल्कि धार्मिक विश्वास का विषय है. उनका कहना है कि जो सनातन धर्म में आस्था रखते हैं, उनका स्वागत है, लेकिन जो नहीं मानते उनके लिए प्रतिबंध जरूरी है. हालांकि यहीं से विवाद और गहरा हो जाता है. सवाल उठता है कि अगर कोई गैर हिंदू श्रद्धा रखता है, तो क्या उसे दर्शन से रोका जाएगा? और क्या एक सरकारी एक्ट के तहत बनी समिति संविधान के अनुच्छेद 15 को दरकिनार कर सकती है?
मंदिर परिसर, कर्मचारी और अगला कदम
BKTC के अनुसार, प्रतिबंध सिर्फ मंदिर के अंदर लागू होगा, जबकि मंदिर परिसर की सीमा भी तय की जाएगी. गैर सनातनी श्रद्धालु एक तय सीमा तक ही रह सकेंगे. समिति का दावा है कि मंदिर परिसर में पहले से कोई गैर हिंदू कर्मचारी नहीं है, क्योंकि सभी व्यवस्थाएं समिति के नियंत्रण में हैं. हालांकि फूल, प्रसाद और माला बेचने वालों को एक तय बाउंड्री में सीमित किया जाएगा. अब यह प्रस्ताव समिति की आगामी बोर्ड बैठक में औपचारिक रूप से रखा जाएगा. सवाल यही है कि क्या सरकार और अदालत इस फैसले का समर्थन करेंगी या यह विवाद और गहराएगा.