बिहार विधानसभा चुनाव में जब नीतीश सरकार ने महिलाओं को 10,000 रुपये की सीधी मदद शुरू की थी, तब राजनीति का मिजाज ही बदल गया था। बड़ी संख्या में महिलाओं ने जाति और परंपरागत समीकरणों से हटकर अपने फायदे के आधार पर वोट किया। इस बदलाव ने सत्ता संतुलन को प्रभावित किया और महिला वोट को निर्णायक ताकत बना दिया। अब कुछ वैसी ही स्थिति पश्चिम बंगाल में बनती दिख रही है। हाल ही में बीजेपी के एक राज्य समिति सदस्य का वायरल बयान पार्टी की अंदरूनी घबराहट को दिखाता है। यह साफ संकेत है कि महिलाओं का झुकाव ममता बनर्जी की योजनाओं की ओर बढ़ रहा है, जो बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
लक्ष्मी भंडार ने बनाया भरोसे का रिश्ता
ममता बनर्जी सरकार की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना 2021 से चल रही है। इसके तहत एससी-एसटी महिलाओं को हर महीने 1200 रुपये और अन्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपये सीधे बैंक खाते में मिलते हैं। यह योजना अब सिर्फ मदद नहीं, बल्कि नियमित आय का भरोसा बन चुकी है। इसका असर मध्य प्रदेश की ‘लाडली बहना’, झारखंड की ‘मइया सम्मान’ और छत्तीसगढ़ की ‘महतारी वंदन’ जैसी योजनाओं की तरह स्थायी दिख रहा है। बंगाल की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना में महिला नेतृत्व और मातृशक्ति की गहरी स्वीकार्यता रही है, जिससे ममता बनर्जी को स्वाभाविक बढ़त मिलती है और बीजेपी को अतिरिक्त संघर्ष करना पड़ता है।
चुनावी नतीजों में दिखा महिला वोट का असर
2021 के विधानसभा चुनाव में इस ट्रेंड के साफ संकेत मिले थे। तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी, जबकि बीजेपी 77 सीटों पर सिमट गई। ममता बनर्जी ने चुनाव को ‘बंगाल की बेटी बनाम बाहरी राजनीति’ के फ्रेम में रखा और महिला वोट निर्णायक साबित हुआ। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यही ट्रेंड दिखा। 42 सीटों में से टीएमसी ने 29 और बीजेपी ने सिर्फ 12 सीटें जीतीं। राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में महिलाओं का बड़ा हिस्सा ममता के साथ गया, जहां महिला-केंद्रित योजनाओं का सीधा असर पड़ा।
2026 में महिला वोट बनेगा गेमचेंजर
अब 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले महिला वोट बीजेपी के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बन गया है। पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि बिहार जैसी नकद सहायता योजनाएं बंगाल में भी अपनाई जाएं। लेकिन यहां मुकाबला आसान नहीं है। ममता बनर्जी पहले से ही लक्ष्मी भंडार, कन्याश्री, रूपश्री और सबुज सथी जैसी योजनाओं का मजबूत नेटवर्क खड़ा कर चुकी हैं। बीजेपी भले ही दूसरे राज्यों में महिला योजनाओं से फायदा उठा चुकी हो, लेकिन बंगाल में महिला कल्याण का नैरेटिव पहले से ही ममता के पक्ष में सेट है। अब महिलाएं धर्म और जाति से ऊपर उठकर सीधे भरोसे और लाभ के आधार पर फैसला कर रही हैं।