Modi को Yogi का खास उपहार, राम मंदिर की अनुकृति में छिपा काशी, सनातन और ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद खास और सांस्कृतिक महत्व से भरा उपहार भेंट किया। यह उपहार गुलाबी मीनाकारी से बनी भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की अनुकृति है। यह भेंट सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि काशी की सदियों पुरानी हस्तकला, सनातन आस्था और ‘वोकल फॉर लोकल’ की सोच को एक साथ दर्शाने वाला प्रतीक बन गई। इसके जरिए योगी सरकार ने यह संदेश दिया कि स्थानीय शिल्प और कारीगरों को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए हर अवसर का रचनात्मक उपयोग किया जा रहा है।

108 दिन, 108 भाग और गहरी आस्था

यह राम मंदिर अनुकृति अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर काशी के शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह द्वारा बनाई गई है। गुलाबी मीनाकारी की इस अद्भुत कृति को तैयार करने में 108 दिन लगे और इसमें 108 अलग-अलग भाग शामिल हैं। निर्माण के दौरान लगातार 108 दिनों तक राम धुन का जाप किया गया। इस अनुकृति में 2 किलोग्राम चांदी, सोने का उपयोग और हीरे की जड़ाई की गई है। भगवान राम की स्वर्ण प्रतिमा, कमल, धनुष-बाण और चारों शिखरों पर जड़े हीरे, सनातन परंपरा में 108 के महत्व को जीवंत करते हैं।

GI टैग से ODOP तक कला की उड़ान

गुलाबी मीनाकारी को जीआई टैग मिलना इसकी मौलिक पहचान की आधिकारिक मान्यता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ यानी ODOP योजना में शामिल कर काशी के कारीगरों को बड़ा सहारा दिया। प्रशिक्षण, डिजाइन में नवाचार, सरकारी प्रदर्शनियों और प्रोटोकॉल गिफ्टिंग के जरिए इस कला को नए बाजार और नई पहचान मिली। आज गुलाबी मीनाकारी केवल स्थानीय शिल्प नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की ब्रांड पहचान बन चुकी है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचा रही है।

सोलहवीं सदी की कला, वैश्विक पहचान

गुलाबी मीनाकारी भारत में 16वीं सदी में आई और समय के साथ काशी की पहचान बन गई। इस कला में मेटल ऑक्साइड से बने रंगों का उपयोग होता है और मीनाकारी केवल शुद्ध सोने व चांदी पर की जाती है। लगभग 800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर इसे पकाया जाता है, जिससे यह प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी ने इस शिल्प को सांस्कृतिक कूटनीति का माध्यम बनाया है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग बढ़ी और बड़ी संख्या में महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर भारत और महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती मिली।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra