प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन घोटाले के एक बड़े मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए गुजरात के सुरेंद्र नगर जिले के डीसी और 2015 बैच के आईएएस अधिकारी राजेंद्र कुमार पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 7 जनवरी तक ईडी की हिरासत में भेज दिया। यह कार्रवाई गुजरात एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है। मामला कृषि भूमि को गैर-कृषि भूमि में बदलने के बदले कथित तौर पर बड़े पैमाने पर रिश्वत और भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।
जमीन घोटाले की पूरी कहानी
दरअसल, सुरेंद्र नगर जिले में कृषि जमीन को एनए (नॉन-एग्रीकल्चर) करने की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं सामने आई थीं। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर मोटी रकम के बदले फाइलें पास की गईं। इसी को लेकर गुजरात एसीबी ने पहले केस दर्ज किया था। बाद में ईडी ने इसे मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानते हुए जांच शुरू की। जांच के दौरान ईडी ने जिला कलेक्टर कार्यालय समेत कई अधिकारियों के ठिकानों पर छापे मारे, जहां से संदिग्ध दस्तावेज और लेनदेन के सुराग मिले। इससे पूरा प्रशासनिक तंत्र सवालों के घेरे में आ गया।
चंद्र सिंह मोरी की भूमिका भी आई सामने
इस केस में डिप्टी मामलतदार यानी तहसीलदार चंद्र सिंह मोरी की भूमिका भी सामने आई है। 1 जनवरी को उनकी रिमांड अवधि खत्म होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। ईडी की पूछताछ में मोरी ने कई अहम खुलासे किए, जिसके बाद राजेंद्र पटेल की गिरफ्तारी हुई। जांच एजेंसी के अनुसार, चंद्र सिंह मोरी के पास से करीब 67 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। यह रकम किसकी थी और किसके इशारे पर वसूली की जा रही थी, यह अब जांच का बड़ा सवाल बन गया है।
किसके इशारे पर चलता रहा खेल
सूत्रों के मुताबिक, इस घोटाले की जानकारी पहले ही दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय तक पहुंचा दी गई थी। इसके बाद एजेंसी ने सुरेंद्र नगर में तैनात कुछ अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। इसी बीच जिला कलेक्टर का अचानक तबादला कर उन्हें प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया, जिसने शक को और गहरा कर दिया। अब ईडी यह जानने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन था, पैसों का मैनेजमेंट किसने किया और इसमें कौन-कौन से अफसर या नेता शामिल हैं। आने वाले दिनों में और बड़े नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।