प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति की 50वीं बैठक में पांच राज्यों में फैली पांच अहम इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा की। इन परियोजनाओं की कुल लागत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में PRAGATI के नेतृत्व वाले इकोसिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अटकी परियोजनाओं को राष्ट्रीय हित में पूरा किया गया है। प्रधानमंत्री के अनुसार, सुधार की गति बनाए रखने और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए ‘प्रगति’ एक जरूरी प्लेटफॉर्म बन चुका है।
सहकारी संघवाद का मजबूत मॉडल
पीएम मोदी ने ‘प्रगति’ को सहकारी संघवाद का बेहतरीन उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि यह मंच साइलो-आधारित कामकाज को तोड़कर केंद्र और राज्यों को एक साथ लाता है। आज 500 से अधिक सचिवों की सक्रिय भागीदारी के साथ यह सिर्फ समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि एक प्रभावी समस्या-समाधान तंत्र बन गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि परियोजनाएं अक्सर समन्वय की कमी से विफल होती हैं, लेकिन ‘प्रगति’ ने साझा मंच देकर इस चुनौती को दूर किया है और टीम वर्क की संस्कृति को मजबूत किया है।
राज्यों को ‘प्रगति’ अपनाने की सलाह
प्रधानमंत्री ने राज्यों को प्रोत्साहित किया कि वे मुख्य सचिव स्तर पर ‘प्रगति’ जैसे तंत्र को संस्थागत बनाएं, खासकर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए। उन्होंने ‘पीएम श्री’ स्कूलों को राज्य सरकारों के अन्य स्कूलों के लिए बेंचमार्क बनाने की बात भी कही। पीएम मोदी ने ‘प्रगति’ के अगले चरण के लिए गुरु मंत्र दिया- सरल बनाने के लिए सुधार, परिणाम देने के लिए प्रदर्शन और प्रभाव डालने के लिए बदलाव। उनका कहना था कि यही सोच विकास को जमीन पर उतारती है।
2047 का लक्ष्य और तकनीक की ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित देश बनाना हमारा राष्ट्रीय संकल्प है और इसके लिए समयबद्ध तरीके से काम करना होगा। इस लक्ष्य को पाने में ‘प्रगति’ एक मजबूत जरिया है। उन्होंने हर प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया, ताकि गति, पारदर्शिता और गुणवत्ता बेहतर हो। पीएम ने कहा कि ‘प्रगति@50’ केवल एक पड़ाव नहीं, बल्कि एक वादा है- आम जनता तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने और विकास के नतीजे साफ तौर पर दिखाने का।