भारत के बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी एक राहत भरी खबर सामने आई है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ताजा ट्रेंड एंड प्रोग्रेस ऑफ बैंकिंग रिपोर्ट के मुताबिक, देश के बैंक पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत स्थिति में हैं. बैंकों की बैलेंस शीट में लगातार सुधार देखने को मिला है. सबसे अहम बात यह है कि बैड लोन यानी खराब कर्ज कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. इसका सीधा मतलब है कि कर्ज लेने वाले लोग और कंपनियां अब समय पर भुगतान कर रही हैं, जिससे बैंकों पर वित्तीय दबाव कम हुआ है.
ग्रॉस NPA ऐतिहासिक निचले स्तर पर
RBI रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 तक बैंकों का ग्रॉस एनपीए रेशियो घटकर 2.1 प्रतिशत रह गया है. इससे पहले मार्च 2025 में यह 2.2 प्रतिशत था. यानी हर 100 रुपये के कर्ज पर अब केवल करीब 2 रुपये ही खराब स्थिति में हैं. यह आंकड़ा बैंकिंग सिस्टम की मजबूती और बेहतर रिस्क मैनेजमेंट को दर्शाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सुधार लंबे समय से किए गए सुधारात्मक कदमों और सख्त निगरानी का नतीजा है.
रिटेल और पर्सनल लोन में मिला असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि हाउसिंग लोन, एजुकेशन लोन और क्रेडिट कार्ड जैसे रिटेल लोन सेगमेंट में एसेट क्वालिटी बेहतर हुई है. हालांकि कुछ क्षेत्रों में अब भी जोखिम बना हुआ है. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे टीवी, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान पर दिए गए कर्ज में बैड लोन का स्तर अभी ऊंचा है. वहीं इंडस्ट्री सेक्टर में लेदर और लेदर प्रोडक्ट्स से जुड़ी कंपनियों के कर्ज में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया. RBI की पर्सनल लोन पर सख्ती का असर भी साफ दिखा है, जिससे जोखिम भरे कर्ज पर लगाम लगी.
मुनाफा स्थिर, जलवायु जोखिम पर नजर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2024-25 के दौरान बैंकों के डिपॉजिट और लोन में अच्छी बढ़ोतरी हुई, हालांकि इसकी रफ्तार पिछले साल से थोड़ी कम रही. ब्याज मार्जिन घटने के कारण मुनाफे की ग्रोथ भी कुछ धीमी हुई है. फिर भी बैंक मजबूत पूंजी आधार और बेहतर लिक्विडिटी के साथ सुरक्षित स्थिति में हैं. इसके साथ ही RBI ने जलवायु परिवर्तन को भविष्य के लिए बड़ा वित्तीय जोखिम बताया है और इसके लिए एक नई सूचना प्रणाली विकसित करने की तैयारी की जा रही है.