India की ब्रिक्स अध्यक्षता से बदलेगा वैश्विक खेल! अमेरिका की टैरिफ नीति उलटी पड़ी, डॉलर की बादशाहत पर संकट

भारत 1 जनवरी 2026 से ब्रिक्स की अध्यक्षता ग्रहण करेगा। यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिल रही है, जब अमेरिका की टैरिफ नीति ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ब्रिक्स देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी ने भारत, चीन और रूस जैसे देशों को और करीब ला दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स एकजुट होकर अमेरिका के दबदबे को खुली चुनौती दे सकता है।

कृषि से व्यापार तक मजबूत साझेदारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिक्स देश अब सिर्फ राजनीति नहीं बल्कि कृषि, खाद्यान्न सुरक्षा और व्यापार जैसे अहम क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं। भविष्य की खाद्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए साझा रणनीति बनाई जा रही है। इसके साथ ही प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जलवायु परिवर्तन और औद्योगिक विकास में भी सहयोग तेज हो रहा है। जानकारों का मानना है कि 2026 के अंत तक इन पहलों का असर साफ दिखेगा और अमेरिका को वैश्विक मंच पर बड़ा झटका लग सकता है।

डॉलर की बादशाहत पर सीधा असर

अब सबसे बड़ा सवाल अमेरिकी डॉलर को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल का उत्पादन, सोने का भंडार और आर्थिक मजबूती किसी देश की सौदेबाजी की ताकत तय करते हैं। ब्रिक्स समूह में शामिल 11 देशों के पास इन सभी क्षेत्रों में मजबूत पकड़ है। यही वजह है कि ब्रिक्स देश पिछले कुछ वर्षों से डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसे अमेरिका के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है।

तेल, जीडीपी और नई आर्थिक धुरी

ब्रिक्स देशों का दुनिया के कच्चे तेल उत्पादन में करीब 42 प्रतिशत योगदान है। इसके अलावा वैश्विक जीडीपी में इन देशों की हिस्सेदारी लगभग 29 प्रतिशत है। भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश इस समूह की रीढ़ हैं। हाल ही में ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को मंजूरी दी गई है, जिससे डॉलर को सीधी चुनौती मिली है। अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते भारत, चीन और रूस के रिश्ते और मजबूत हो रहे हैं, जो आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन बदल सकते हैं।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra