चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह चीन और भारत के बीच बेहतर होते संबंधों में बाधा डालने की कोशिश कर रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद केवल दोनों देशों का आपसी मामला है और इसमें किसी तीसरे देश को दखल देने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने साफ किया कि चीन भारत के साथ अपने रिश्तों को रणनीतिक, दीर्घकालिक और व्यापक दृष्टिकोण से देखता है। चीन का मानना है कि दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग से ही मुद्दों का समाधान संभव है।
अमेरिकी रिपोर्ट की पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन की एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन सीमा पर बने तनाव का लाभ उठाकर भारत के साथ अपने रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन का उद्देश्य अमेरिका और भारत के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को कमजोर करना है। पेंटागन ने यह भी आरोप लगाया कि चीन भारत के प्रति दोहरा रवैया अपना रहा है।
पाकिस्तान और चीन की सैन्य साझेदारी
अमेरिकी रिपोर्ट में चीन और पाकिस्तान के गहरे सैन्य सहयोग का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में चीन ने पाकिस्तान को 36 J-10C लड़ाकू विमान और चार आधुनिक फ्रिगेट जहाज दिए हैं। इसके अलावा, दोनों देश मिलकर JF-17 लड़ाकू विमान का निर्माण भी कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन कदमों से क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर असर पड़ता है और भारत-चीन संबंधों में भरोसे की कमी बनी हुई है।
भारत-चीन विवाद और हालिया संकेत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। वर्ष 2020 में हुए सैन्य तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी खटास आ गई थी। इसके बाद तनाव कम करने और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कई सैन्य और कूटनीतिक वार्ताएं हुईं। साल 2025 में BRICS सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात को रिश्तों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा गया।
भारत की सतर्क रणनीति
चीन की ओर से रिश्ते सुधारने के संकेतों के बावजूद भारत पूरी तरह सतर्क है। भारत चीन के हर कदम का बारीकी से आकलन कर रहा है और किसी भी तरह की जल्दबाजी से बच रहा है। भारत का फोकस सीमा विवाद पर नियंत्रण बनाए रखने और लंबे समय तक स्थिर व संतुलित संबंध कायम करने पर है। दोनों देशों के लिए यह जरूरी है कि मतभेदों को बातचीत से सुलझाया जाए ताकि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनी रह सके।