Vaastu Shastra: घर में बरकत चाहिए? तो भोजन करते समय भूलकर भी न करें ये गलती, जानें उपाय

वास्तु शास्त्र में जीवन को सुखी और समृद्ध बनाने के कई उपाय बताए गए हैं। इन उपायों में घर की बनावट, दिशा, ऊर्जा प्रवाह और व्यवहार से जुड़े नियम शामिल हैं। भोजन से संबंधित परंपराएं भी वास्तु का अहम हिस्सा मानी गई हैं। कहा जाता है कि यदि व्यक्ति खाने से जुड़ी गलतियाँ करता है या वास्तु के नियमों का पालन नहीं करता, तो उसे जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भोजन से जुड़े वास्तु सिद्धांतों को समझना और उनका पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है।

चौखट पर बैठकर भोजन करना क्यों माना जाता है अशुभ

वास्तु शास्त्र में साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को घर की चौखट पर बैठकर भोजन नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि चौखट घर का सबसे संवेदनशील और पवित्र हिस्सा होता है, जहाँ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। ऐसे स्थान पर बैठकर खाने से न सिर्फ घर की पवित्रता भंग होती है, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करने लगती है। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और आर्थिक समस्याएँ बढ़ सकती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि व्यक्ति हमेशा घर के अंदर और शांत वातावरण में बैठकर ही भोजन करे।

पूर्व दिशा में मुंह करके भोजन करना होता है शुभ

वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व माना गया है। कहा जाता है कि भोजन करते समय व्यक्ति को पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठना चाहिए। पूर्व दिशा को उगते सूर्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। इस दिशा की ओर मुख करके भोजन करने से न सिर्फ पाचन शक्ति बेहतर होती है, बल्कि मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मकता भी बढ़ती है। माना जाता है कि इस तरह भोजन करने से व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य, सौभाग्य और संतुलन आता है। कई परिवार आज भी भोजन के समय दिशा को विशेष महत्व देते हैं।

टूटे बर्तनों में भोजन करना माना जाता है अपशकुन

वास्तु शास्त्र में भोजन को भगवान का प्रसाद माना गया है। इसलिए इसे सम्मानपूर्वक ग्रहण करना चाहिए। इसी कारण टूटे, खुरचे या दरार वाले बर्तनों में खाना खाना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से भोजन का अपमान होता है और व्यक्ति के जीवन में नकारात्मक प्रभाव बढ़ते हैं। कहा जाता है कि टूटे बर्तनों में भोजन करने से दुर्भाग्य बढ़ता है और सुख-समृद्धि कम होने लगती है। इसलिए हमेशा साफ-सुथरे और साबुत बर्तनों में ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra