अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों ने भारतीय रुपये पर लगातार दबाव बढ़ा दिया था। खासकर जब उन्होंने भारत के बासमती चावल पर नए टैरिफ की चेतावनी दी, तब शुरुआती कारोबारी सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर गिरावट में चला गया। कुछ समय पहले तक डॉलर की कीमत 83 रुपये के आसपास थी, जो ट्रंप टैरिफ की आशंका के चलते 90 रुपये पार चली गई थी। लेकिन मंगलवार की ट्रेडिंग के अंत में ऐसा उलटफेर हुआ कि किसी को विश्वास करना मुश्किल था।
बंद होते मजबूत हुआ रुपया
सुबह की 10 पैसे की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए रुपया दिन के अंत में 17 पैसे की मजबूती के साथ 89.88 पर बंद हुआ। यानी ट्रंप की धमकी के बीच रुपये ने मजबूत वापसी की। जानकारों के मुताबिक इसके पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक है, जिसमें 25 बेसिस प्वाइंट की दर कटौती की उम्मीद की जा रही है। डॉलर के कमजोर होने का फायदा तत्काल रुपये को मिला और वह 90 रुपये के स्तर से नीचे आ गया।
डॉलर की गिरावट और तेल के दाम ने संभाला बाजार
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने रुपये को मजबूत होने में अहम समर्थन दिया। इंटरबैंक बाजार में रुपया 90.15 के कमजोर स्तर पर खुला, लेकिन दिन चढ़ने के साथ दबाव कम हुआ और अंत में 89.88 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहने से रुपये की तेजी सीमित रह गई। निवेशक फिलहाल फेड की नीतिगत घोषणा का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बाजार की दिशा और साफ हो सकेगी।
डॉलर इंडेक्स और ग्लोबल संकेतों में बदलाव
डॉलर इंडेक्स 0.10% की गिरावट के साथ 98.98 पर पहुंच गया, जिससे वैश्विक करेंसी बाजारों में डॉलर पर दबाव बना। वहीं ब्रेंट क्रूड भी 0.27% गिरकर 62.33 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कम तेल कीमतें भारत के लिए राहत होती हैं और यह सीधे रुपये को मजबूत करने में मदद करती हैं। इस बीच भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर तीन दिवसीय वार्ता भी शुरू होने जा रही है, जिसका भावनाओं पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
क्यों मिली रुपये को मजबूती
मिराए एसेट शेयरखान के विश्लेषकों के अनुसार, आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप और कच्चे तेल की गिरावट ने रुपये को निचले स्तरों से उबरने में बड़ी भूमिका निभाई। फेड की दर कटौती की उम्मीदों के चलते डॉलर में कमजोरी जारी रह सकती है, जिससे रुपये को फिर समर्थन मिलेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि डॉलर-रुपया का दायरा अभी 89.50 से 90.30 के बीच बना रह सकता है।