हाल के दिनों में निफ्टी और सेंसेक्स ने नए-नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जिससे लगता है कि शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी है. लेकिन ज़्यादातर आम निवेशकों को यह तेजी अपने पोर्टफोलियो में दिखाई ही नहीं दे रही. इसकी वजह यह है कि इंडेक्स की चमक असल में पूरे बाजार की सच्ची तस्वीर नहीं दिखाती. इंडेक्स ऊपर है, लेकिन रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो वाले स्टॉक्स अभी भी पिछड़ रहे हैं.
तेजी सिर्फ गिने-चुने दिग्गज स्टॉक्स में
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इंडेक्स में दिख रही उछाल मुख्य रूप से कुछ बड़े लार्ज-कैप स्टॉक्स की वजह से है. निफ्टी और सेंसेक्स में भारी वजन रखने वाली कंपनियां शानदार प्रदर्शन कर रही हैं, जिससे इंडेक्स लगातार ऊपर बढ़ रहा है. मगर दिक्कत यह है कि बाकी बाजार अभी भी मजबूती नहीं दिखा रहा. रिटेल निवेशकों के पोर्टफोलियो में आमतौर पर ऐसे छोटे और मिड-साइज वाले स्टॉक्स होते हैं, जिनमें अभी सुधार बहुत धीमा या बिल्कुल नहीं है.
स्मॉल-कैप में रिटेल का झुकाव और गिरावट की हकीकत
कोविड के बाद मार्केट में आए नए रिटेल निवेशकों ने स्मॉल-कैप और माइक्रो-कैप स्टॉक्स में भारी निवेश किया. उन्हें लगा कि छोटे स्टॉक्स तेज़ी के दौर में हमेशा बड़े रिटर्न देते हैं. लेकिन मौजूदा स्थिति इसके उलट है. निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स अभी भी अपने पुराने रिकॉर्ड से लगभग 9% नीचे है, जबकि माइक्रोकैप इंडेक्स करीब 10% गिरा हुआ है. यानी जहां निवेशकों ने ज्यादा उम्मीदें लगाई थीं, वही हिस्सा अभी तक संभल नहीं पाया है.
इंडेक्स का बोझ उठाते कुछ चुनिंदा हैवीवेट
SAMCO रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि निफ्टी को ऊपर ले जाने में सिर्फ चुनिंदा भारीभरकम कंपनियों का योगदान है. करीब 8–10 बड़े स्टॉक्स इतनी तेजी में हैं कि इंडेक्स मजबूत दिखता है, लेकिन व्यापक बाजार यानी मिड, स्मॉल और माइक्रो-कैप अभी पिछड़े हुए हैं. यही वजह है कि इंडेक्स रिकॉर्ड पर है, पर निवेशकों के पोर्टफोलियो में खुशहाली नहीं आ पा रही.
रिटेल निवेशकों को सुधार कब दिखेगा?
जानकारों का मानना है कि पोर्टफोलियो में असली सुधार तभी नजर आएगा जब तेजी पूरे बाजार में फैलेगी. सिर्फ बड़े स्टॉक्स की रैली से रिटेल निवेशकों को फायदा नहीं मिलेगा. उन्हें राहत तब मिलेगी जब मिड-कैप और स्मॉल-कैप में भी खरीदारी बढ़े. अभी की परिस्थितियां संकेत दे रही हैं कि छोटे स्टॉक्स का दबाव कुछ समय और जारी रह सकता है, इसलिए निवेशकों को धैर्य और संतुलित रणनीति की जरूरत है.