बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को काफी उत्साहित कर दिया है। जीत के बाद उनकी पार्टी एलजेपी (रामविलास) के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। इस मुलाकात के दौरान पार्टी ने स्पष्ट कर दिया कि वे नई सरकार में शामिल होने के इच्छुक हैं। चिराग ने निजी तौर पर भी यह राय जताई कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद पर बने रहना चाहिए।
एलजेपीआर ने दिखाया दम
इस चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी ने 28 सीटों पर दांव लगाया था, जिनमें से 19 पर शानदार जीत मिली। इस प्रदर्शन से उत्साहित चिराग ने विपक्ष पर यह कहते हुए पलटवार किया कि कुछ दल उनके और नीतीश कुमार के संबंधों को लेकर झूठे बयान गढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि असलियत इसके बिल्कुल उलट है।
सरकार में शामिल होने की इच्छा
चिराग पासवान ने स्वीकार किया कि पहले वे सरकार को बाहर से समर्थन देते थे क्योंकि विधानसभा में उनकी कोई मौजूदगी नहीं थी। लेकिन अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं और पार्टी सत्ता में भागीदारी चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री कौन होगा, यह निर्णय पूरी तरह विधायकों पर निर्भर है, पर उनकी व्यक्तिगत राय यही है कि नीतीश कुमार आगे भी सरकार चलाएँ।
नीतीश–जदयू के प्रदर्शन पर टिप्पणी
इस चुनाव में जदयू ने 85 सीटें जीतकर भाजपा से चार कम सीटें हासिल की हैं। यह दूसरी बार है जब नीतीश कुमार की पार्टी अपने सहयोगी से पीछे रही है। इसके बावजूद चिराग का मानना है कि नीतीश का अनुभव और जनता में उनकी स्वीकार्यता उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए उपयुक्त बनाती है।
आरजेडी पर चिराग का हमला
चिराग पासवान ने आरजेडी पर निशाना साधते हुए कहा कि 2020 में उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा नहीं थी, जिससे आरजेडी को फायदा मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी पार्टी बनने के बाद आरजेडी में अहंकार बढ़ गया। चिराग ने कहा कि बिहार की जनता ने आरजेडी के ‘जंगल राज’ को बहुत पहले नकार दिया था और पार्टी को जो भी मौका मिला, वह परिस्थितियों की वजह से था।
अपनी विरासत पर भरोसा
चिराग पासवान ने चुनाव में मिली जीत को अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत का परिणाम बताया। उन्होंने याद दिलाया कि उनके पिता ने कठिन दौर झेला था, लेकिन 2014 में पार्टी को फिर से मजबूती से खड़ा कर दिया। चिराग ने कहा कि वही जज्बा और आत्मविश्वास अब उनकी रगों में भी बह रहा है।