Amavasya पर करें ये काम, पितृ दोष होगा दूर, जीवन में लौटेगा सुख और समृद्धि

हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष को बहुत गंभीर माना गया है. यह वह दोष होता है जब हमारे पूर्वज किसी कारणवश असंतुष्ट या अतृप्त रह जाते हैं. उनकी अधूरी इच्छाओं या अपूर्ण कर्मों के प्रभाव से वंशजों के जीवन में बाधाएं आने लगती हैं. यह दोष केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है. ज्योतिष के अनुसार, जब किसी व्यक्ति के जीवन में बार-बार आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह या संतान से जुड़ी परेशानियां होती हैं, तो यह पितृ दोष का संकेत हो सकता है.

क्या है पितृ दोष?

ज्योतिष के अनुसार, जब किसी की कुंडली में सूर्य और राहु की युति होती है या नवम भाव (पिता और धर्म का भाव) और पंचम भाव (संतान का भाव) में राहु या केतु विराजमान होते हैं, तो पितृ दोष बनता है. इसके अलावा, यदि पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण या अंतिम संस्कार विधि-विधान से नहीं हुआ या वे किसी कारण दुखी रहे, तो भी यह दोष सक्रिय हो सकता है. यह दोष जीवन के तीन मुख्य पहलुओं धन, शांति और वंश वृद्धि को प्रभावित करता है.

पितृ दोष के प्रभाव और लक्षण

पितृ दोष से प्रभावित व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की समस्याएं आती हैं. धन की कमी, व्यवसाय या नौकरी में बाधा, लगातार असफलता और घर में कलह-क्लेश इसका प्रमुख संकेत हैं. कई बार परिवार में कोई न कोई बीमार रहता है, विवाह में अड़चनें आती हैं या शादी के बाद वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ जाता है. कुछ मामलों में संतान की प्राप्ति में भी कठिनाई होती है. अगर बार-बार गर्भपात या संतान का स्वास्थ्य बिगड़ता है, तो यह भी पितृ दोष का प्रभाव हो सकता है.

पितृ दोष से मुक्ति के उपाय

इस दोष से मुक्ति पाने के लिए सबसे आवश्यक है पितरों की तृप्ति. अमावस्या या पितृ पक्ष में विधिवत तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है. इसके अलावा हर अमावस्या को पीपल के पेड़ की पूजा करना शुभ माना गया है. दोपहर के समय पीपल पर जल, दूध, तिल और फूल चढ़ाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. शाम को घर की दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाकर पितरों को प्रणाम करें. पितृ तिथि पर ब्राह्मणों और गरीबों को भोजन कराना तथा दान देना भी अत्यंत फलदायी होता है.

आध्यात्मिक उपाय से राहत

पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए रोजाना गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. यह मन और आत्मा दोनों को शांति देता है. माना जाता है कि जब पितर प्रसन्न होते हैं, तो जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता स्वतः आने लगती है.

Rishabh Chhabra
Author: Rishabh Chhabra