Brain Health: सोते समय भी आ सकता है जानलेवा स्ट्रोक, सुबह उठते ही दिखें ये 5 लक्षण तो तुरंत भागें अस्पताल

सोते समय स्ट्रोक आना बेहद खतरनाक हो सकता है। कई बार व्यक्ति रात में बिल्कुल ठीक होता है, लेकिन सुबह उठते ही शरीर में अचानक बदलाव महसूस होने लगते हैं। इसे वेक-अप स्ट्रोक कहते हैं। समय पर लक्षणों की पहचान और इलाज न मिलने पर दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

क्या होता है वेक-अप स्ट्रोक?

स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। यह तब होता है, जब दिमाग तक खून और ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है या दिमाग की कोई नस फट जाती है। इससे दिमाग की कोशिकाएं धीरे-धीरे खराब होने लगती हैं। जब किसी व्यक्ति को सोते समय स्ट्रोक आता है और उसे सुबह उठने पर इसके लक्षण पता चलते हैं, तो इसे वेक-अप स्ट्रोक कहा जाता है। इसमें इलाज शुरू होने में देरी होने का खतरा रहता है।

सोते समय क्यों आता है स्ट्रोक?

स्ट्रोक आने का कोई तय समय नहीं होता। यह दिन या रात किसी भी समय हो सकता है। कई बार सोते समय दिमाग तक खून पहुंचाने वाली नस में थक्का जम जाता है। वहीं, कुछ मामलों में दिमाग की नस फट जाती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियां इसका खतरा बढ़ाती हैं। इसके अलावा धूम्रपान, गलत खानपान और एक्सरसाइज न करना भी जोखिम बढ़ा सकता है।

सुबह उठते ही दिखे शरीर में कमजोरी

वेक-अप स्ट्रोक का एक बड़ा संकेत शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी होना है। सुबह उठने पर व्यक्ति को हाथ या पैर हिलाने में परेशानी हो सकती है। कई बार शरीर का एक हिस्सा सुन्न भी पड़ जाता है। कुछ लोगों का चेहरा एक तरफ झुक जाता है। अगर ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें, तो इन्हें सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बोलने और देखने में हो सकती है परेशानी

स्ट्रोक आने पर व्यक्ति को बोलने या दूसरों की बात समझने में परेशानी हो सकती है। उसकी आवाज लड़खड़ा सकती है या वह ठीक से शब्द नहीं बोल पाता। इसके अलावा अचानक धुंधला दिखाई देना, तेज चक्कर आना और चलते समय संतुलन बिगड़ना भी इसके लक्षण हैं। कुछ मामलों में अचानक बहुत तेज सिरदर्द भी हो सकता है। ऐसे संकेत दिखने पर तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।

स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो क्या करें?

अगर सुबह उठने पर किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो बिना देर किए एंबुलेंस बुलाएं और अस्पताल पहुंचाएं। डॉक्टर को बताएं कि मरीज को आखिरी बार कब बिल्कुल ठीक देखा गया था और सुबह कौन से लक्षण नजर आए। यह जानकारी इलाज के लिए बहुत जरूरी होती है। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल नहीं जाना चाहिए और न ही उसे अकेला छोड़ना चाहिए।

खुद से दवा देना पड़ सकता है भारी

स्ट्रोक के मामले में समय बहुत कीमती होता है। कुछ मरीजों को खून का थक्का हटाने या ब्लड फ्लो दोबारा शुरू करने के लिए विशेष इलाज दिया जाता है। लेकिन इसके लिए पहले डॉक्टर की जांच और जरूरी स्कैन करना होता है। मरीज को खुद से एस्पिरिन या कोई दूसरी दवा बिल्कुल न दें, क्योंकि नस फटने और खून का थक्का जमने से होने वाले स्ट्रोक का इलाज अलग-अलग होता है। सही समय पर इलाज मिलने से गंभीर नुकसान का खतरा कम किया जा सकता है।

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Author: The Hindi Post