उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया था कि एसडीएम अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड बीजेपी कार्यकर्ताओं को दे रहे हैं। उनका दावा था कि कार्यकर्ता VRC में बैठकर सपा समर्थकों के वोट कटवा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हर विधानसभा क्षेत्र में करीब 10 हजार सपा समर्थकों के वोट काटने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, ये आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मांगी शिकायत की जानकारी
रामगोपाल यादव के आरोपों पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर किसी विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ERO को लेकर कोई शिकायत या संदेह है तो उसकी जानकारी दी जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कराई जाएगी और गड़बड़ी सामने आने पर प्रभावी कार्रवाई होगी। इसी बीच निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
ID-पासवर्ड साझा किया तो होगी कार्रवाई
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि कोई भी अधिकारी अपनी लॉगिन आईडी, पासवर्ड और OTP किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं करेगा। इसके अलावा सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी DM को रोजाना अपने DEO लॉगिन से ECI नेट पर लॉगिन करना होगा। उन्हें मतदाता सूची से जुड़े कामों की खुद निगरानी करनी होगी। आवेदन लंबित मिलने, गलत मतदाता सूची तैयार होने या निगरानी में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित DM की जवाबदेही तय की जाएगी।
SDM से लेकर BLO तक की होगी जांच
निर्वाचन आयोग के नए निर्देशों के तहत SDM, ERO, AERO, BLO सुपरवाइजर और BLO की प्रोफाइल की जांच की जाएगी। इसमें अधिकारियों का नाम, मोबाइल नंबर, पदनाम और फोटो शामिल हैं। इसके साथ ही सभी अधिकारियों के आखिरी लॉगिन की रोजाना समीक्षा होगी। फॉर्म-6, 6A, 7 और 8 के लंबित आवेदनों की भी जांच की जाएगी। अगर कोई आवेदन गलत अधिकारी के पास पहुंच जाता है तो उसे तुरंत सही अधिकारी को भेजना होगा, ताकि मतदाताओं को परेशानी न हो।
शिकायतों पर DM को हर हफ्ते देनी होगी रिपोर्ट
मतदाता सूची और EPIC कार्ड से जुड़ी शिकायतों को लेकर भी आयोग ने सख्ती दिखाई है। अब सभी जिलों के DM को हर सप्ताह समीक्षा बैठक करनी होगी। इस दौरान शिकायतों के निस्तारण की स्थिति जांची जाएगी। इतना ही नहीं, शिकायतों पर दिए गए जवाबों का सैंपल परीक्षण भी कराया जाएगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि शिकायतों को सिर्फ कागजों पर निपटाया न जाए, बल्कि लोगों की समस्याओं का सही समाधान भी हो।
BLO ने 48 घंटे तक कॉल नहीं उठाई तो कार्रवाई
मतदाताओं की सुविधा के लिए शुरू की गई ‘बुक ए कॉल विद BLO’ सेवा को लेकर भी नए निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत किसी भी नागरिक की कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से ज्यादा लंबित नहीं रहनी चाहिए। अगर कोई BLO बिना नागरिक से संपर्क किए ही पोर्टल पर ‘Contacted’ या ‘Unavailable’ का विकल्प चुनता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। आयोग के इन निर्देशों का उद्देश्य मतदाता सूची से जुड़े कामों में पारदर्शिता बढ़ाना और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकना है।