Karwa Chauth पर भद्रा का साया या नहीं? जानें सरगी का समय, पूजा मुहूर्त और व्रत से जुड़ी जरूरी बातें

करवा चौथ हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस दौरान सुबह सरगी खाने से लेकर शाम को पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने तक कई परंपराओं का पालन किया जाता है। इस बार करवा चौथ पर भद्रा काल को लेकर भी लोगों के मन में सवाल हैं। आइए जानते हैं भद्रा का समय, पूजा का मुहूर्त और सरगी से जुड़ी जरूरी बातें।

करवा चौथ 2026 पर भद्रा कब लगेगी?

दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, भद्रा काल 28 अक्टूबर 2026 को सुबह 5 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा और 29 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा। यानी करवा चौथ की सुबह होने से पहले ही भद्रा खत्म हो जाएगी। हिंदू मान्यताओं में भद्रा को ऐसा समय माना जाता है, जिसमें कुछ शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, किसी भी धार्मिक कार्य का सही समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना जरूरी है।

क्या करवा चौथ की पूजा पर पड़ेगा असर?

करवा चौथ की मुख्य पूजा शाम के समय की जाती है। दिए गए समय के अनुसार, 29 अक्टूबर को पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक बताया गया है। इस समय तक भद्रा समाप्त हुए कई घंटे बीत चुके होंगे। इसलिए दिए गए पंचांग के हिसाब से भद्रा के कारण शाम की पूजा में बाधा नहीं होगी। महिलाएं इस दौरान भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा कर सकती हैं।

सरगी खाने के समय का रखें ध्यान

करवा चौथ पर सरगी का विशेष महत्व होता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी खाती हैं और इसके बाद व्रत शुरू करती हैं। सरगी में फल, सूखे मेवे, मिठाई और पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। दिए गए विवरण के मुताबिक, भद्रा 29 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 27 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। ऐसे में सरगी के समय को लेकर भद्रा की अलग से बाधा नहीं बताई गई है। सरगी का समय स्थानीय सूर्योदय और परिवार की परंपरा के अनुसार तय करें।

करवा चौथ 2026 का पूजा मुहूर्त

इस साल करवा चौथ की शाम की पूजा के लिए शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक का समय बताया गया है। महिलाएं पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनती हैं और पूजा स्थल तैयार करती हैं। इसके बाद भगवान गणेश, शिव-पार्वती और करवा माता की आराधना की जाती है। इस दौरान करवा चौथ की कथा सुनने और व्रत के नियमों का पालन करने की परंपरा है। पूजा का समय अपने शहर के पंचांग से जरूर मिलाएं।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा

करवा चौथ का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद खोला जाता है। महिलाएं चंद्रमा निकलने पर छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और अर्घ्य देकर पति की लंबी उम्र तथा सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोलने की परंपरा है। चंद्रमा निकलने का समय शहर के हिसाब से अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय चंद्रोदय का समय देखना जरूरी है।

व्रत से पहले इन बातों का रखें ध्यान

करवा चौथ के दिन पूजा, सरगी और चंद्रोदय का समय पहले से जान लेना बेहतर रहता है। भद्रा को लेकर चिंता करने से पहले विश्वसनीय पंचांग से समय की पुष्टि करें। अगर आप गर्भवती हैं, किसी बीमारी से जूझ रही हैं या नियमित दवाएं लेती हैं, तो निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लें। धार्मिक परंपराओं के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है।

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Author: The Hindi Post