Dussehra 2026 पर भूलकर भी न करें ये 6 गलतियां, पूजा-पाठ से लेकर दान तक इन बातों का रखें खास ध्यान

दशहरा हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इसे विजयादशमी भी कहा जाता है। साल 2026 में दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। वहीं, मां दुर्गा ने नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का अंत किया था। इस दिन देशभर में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले जलाए जाते हैं।

दशहरे पर तामसिक भोजन से बनाएं दूरी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरे के दिन खानपान में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इस दिन मांस, मछली, अंडे और शराब जैसी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कई परिवारों में प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं किया जाता। मान्यता है कि त्योहार के दिन सात्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और पूजा-पाठ में ध्यान लगाने में मदद मिलती है। हालांकि, खानपान से जुड़ी परंपराएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।

किसी का अपमान और लड़ाई-झगड़ा न करें

दशहरा खुशियों, सद्भाव और सकारात्मकता का त्योहार है। इसलिए इस दिन किसी का अपमान करने, कड़वे शब्द बोलने या लड़ाई-झगड़ा करने से बचने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों के साथ सम्मान से पेश आना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में दूसरों के प्रति दया और अच्छे व्यवहार को महत्व दिया गया है। इस दिन परिवार और समाज में प्रेम बनाए रखना और आपसी विवादों को दूर करने की कोशिश करना शुभ माना जाता है।

पशु-पक्षियों और प्रकृति को नुकसान न पहुंचाएं

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, दशहरे के दिन किसी भी जीव-जंतु को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। पशु-पक्षियों के साथ दुर्व्यवहार करने और पेड़-पौधों को अनावश्यक रूप से नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। यह पर्व हमें बुराई छोड़कर अच्छे रास्ते पर चलने की सीख देता है। ऐसे में जीवों के प्रति दया दिखाना और प्रकृति की रक्षा करना त्योहार की भावना के अनुरूप है। इस दिन जरूरतमंदों की मदद करना और पशु-पक्षियों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करना भी अच्छा कदम हो सकता है।

दान करते समय इन बातों का रखें ध्यान

कुछ धार्मिक मान्यताओं में दशहरे के दिन हल्दी, चमड़े से बनी वस्तुएं और फटे-पुराने कपड़े दान करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसी तरह, शाम के समय किसी को सुई, नमक या चीनी देने से भी परहेज करने की परंपरा कुछ जगहों पर प्रचलित है। हालांकि, ये मान्यताएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं। दान का उद्देश्य जरूरतमंदों की सहायता करना है, इसलिए साफ-सुथरे कपड़े, भोजन और उपयोगी वस्तुएं जरूरतमंद लोगों को देना अच्छा माना जाता है।

शस्त्र पूजा और औजारों की सफाई न भूलें

दशहरे पर शस्त्र पूजा की विशेष परंपरा है। कई जगहों पर लोग अपने औजारों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की सफाई करके उनकी पूजा करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से काम में सफलता और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन पूजा के साथ अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को याद रखना भी जरूरी है। ध्यान रखें कि दशहरे पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं, इससे जुड़ी कई बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। त्योहार का मुख्य संदेश सत्य, सदाचार और बुराई पर अच्छाई की जीत है।

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Author: The Hindi Post