UP में कुर्मी मुख्यमंत्री की मांग तेज, लखनऊ में लगे पोस्टर; 2027 चुनाव से पहले 2 नवंबर को महापंचायत की तैयारी

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद पर सामाजिक प्रतिनिधित्व की मांग तेज होने लगी है। राजधानी लखनऊ में कुर्मी समाज के मुख्यमंत्री की मांग को लेकर होर्डिंग और पोस्टर लगाए गए हैं। इनके जरिए समाज के लोगों से राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य कुर्मी समाज की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना और मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी को सार्वजनिक चर्चा में लाना है।

अभियान समिति ने दिया एकजुटता का संदेश

कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति इस मांग को लेकर जनजागरण अभियान चला रही है। अभियान से जुड़े पोस्टरों पर लिखा है, ‘अब सामाजिक ठेकेदारी नहीं, समाज का साथ चलेगा।’ इस संदेश के जरिए समाज के लोगों से साझा मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की गई है। समिति का जोर इस बात पर है कि राजनीतिक दलों में बंटे होने के बावजूद समाज के लोग अपने प्रतिनिधित्व और सम्मान से जुड़े सवालों पर साथ आएं।

2 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत की तैयारी

कुर्मी समाज की राजनीतिक दावेदारी को मजबूत करने के लिए 2 नवंबर 2026 को लखनऊ में महापंचायत आयोजित करने की तैयारी है। अभियान समिति चाहती है कि इस कार्यक्रम में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हों। इसके लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के कुर्मी नेताओं, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है। समिति की नजर इस आयोजन के जरिए व्यापक समर्थन जुटाने पर है।

अनुप्रिया पटेल समेत प्रमुख नेताओं से अपील

महापंचायत में केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल समेत समाज के प्रमुख नेताओं को शामिल होने का निमंत्रण देने की अपील की गई है। हालांकि, अलग-अलग राजनीतिक दलों में सक्रिय नेताओं को एक मंच पर लाना समिति के लिए बड़ी चुनौती होगी। अनुप्रिया पटेल अपना दल (एस) की प्रमुख हैं, जबकि पल्लवी पटेल अपना दल (कमेरावादी) से जुड़ी हैं। दोनों नेताओं की राजनीतिक राह अलग है। ऐसे में साझा सामाजिक मुद्दों पर उनकी भागीदारी इस पहल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

2027 चुनाव से पहले राजनीतिक दावेदारी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुर्मी समाज की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद पर समाज के प्रतिनिधित्व की मांग उठना राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है। अभियान समिति इस मांग को किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित रखने के बजाय व्यापक सामाजिक मुद्दे के रूप में आगे बढ़ाना चाहती है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद को लेकर यह अभियान अभी एक मांग और राजनीतिक पहल के रूप में सामने आया है। इसका चुनावी असर आगे की गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

एकता, संगठन और सम्मान पर जोर

कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति के संयोजक पटेल अभिषेक चौधरी ने समाज के लोगों से एकजुट होकर आगे आने की अपील की है। अभियान में एकता, संगठन, संघर्ष और सम्मान को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। समिति का मानना है कि अलग-अलग दलों में सक्रिय होने के बावजूद समाज के लोग साझा हितों पर एकजुट हो सकते हैं। अब सबकी नजर 2 नवंबर को प्रस्तावित महापंचायत पर है। यह देखना अहम होगा कि इस आयोजन में कितने नेता और सामाजिक प्रतिनिधि शामिल होते हैं और अभियान को कितना समर्थन मिलता है।

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Author: The Hindi Post