कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को फिलहाल जेल से राहत नहीं मिली है। सोमवार को एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी। अब उन्हें बुधवार को फिर से अदालत में पेश किया जाएगा। दोनों नेताओं की रिहाई की उम्मीद कर रहे समर्थकों को फिलहाल इंतजार करना होगा। उनके वकीलों के मुताबिक, जमानत के लिए पेश किए गए दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी के कारण जमानत की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
जमानत की कोशिश के बीच राज्य की नई अर्जी
CJP नेताओं के वकील ने बताया कि सोमवार को दोनों की पांच दिन की न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी हो गई थी। पिछली सुनवाई में अदालत ने जमानत के लिए पेश किए गए दस्तावेजों को पर्याप्त नहीं माना था। इसके बाद बचाव पक्ष ने नए जमानत दस्तावेज पेश किए। वकील के अनुसार, सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से एक नई अर्जी दी गई, जिसमें पांच से सात दिन की अतिरिक्त न्यायिक हिरासत की मांग की गई थी। इसके बाद अदालत ने दो दिन की हिरासत बढ़ाने का फैसला सुनाया।
सार्वजनिक शांति को खतरे का दिया गया हवाला
वकील के मुताबिक, राज्य की ओर से दलील दी गई कि दोनों नेताओं की रिहाई से सार्वजनिक व्यवस्था और शांति को खतरा हो सकता है। इसी आधार पर उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग की गई। बचाव पक्ष ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। वकील का दावा है कि दोनों को एहतियातन हिरासत में रखा गया है, क्योंकि आशंका जताई गई थी कि वे दोबारा विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
वकीलों ने हिरासत पर उठाए सवाल
दोनों नेताओं के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ कोई लंबित मामला या ऐसी जांच नहीं है, जिसके लिए उनसे पूछताछ जरूरी हो। उन्होंने एहतियातन हिरासत में रखने के आधार पर भी सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने इस कार्रवाई को परेशान करने वाला बताते हुए कहा कि वह कानूनी तरीके से मामले को आगे बढ़ाएगा। हालांकि, ये दलीलें बचाव पक्ष के वकील की ओर से दी गई हैं। मामले में अदालत के सामने राज्य का पक्ष और संबंधित दस्तावेज भी महत्वपूर्ण होंगे।
13 अक्टूबर को जंतर-मंतर से हुई थी गिरफ्तारी
आशुतोष रांका और सौरव दास को 13 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अपनी पार्टी के 12 अन्य सदस्यों के साथ कथित तौर पर जंतर-मंतर में बिना अनुमति दाखिल हुए थे। आरोप है कि यह स्थान उस समय विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित नहीं था और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली गई। इसके बाद दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसी कार्रवाई के बाद से उनकी रिहाई को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।
बुधवार की सुनवाई पर टिकी निगाहें
CJP की ओर से आरोप लगाया गया है कि दोनों नेताओं की जमानत प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है, ताकि उनकी रिहाई रोकी जा सके। वहीं, राज्य की ओर से सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का हवाला दिए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल अदालत ने दोनों की हिरासत दो दिन बढ़ाई है। अब बुधवार को होने वाली पेशी अहम होगी। उस दौरान जमानत से जुड़े दस्तावेजों, हिरासत की जरूरत और दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।