अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के बयान के बाद 100% टैरिफ लगाए जाने की आशंका चर्चा में है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले करीब 10 दिनों में इस मामले पर फैसला ले सकते हैं। हालांकि, अभी तक भारत पर 100% टैरिफ लगाने का कोई अंतिम फैसला घोषित नहीं हुआ है। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय निर्यातकों, कारोबारियों और आम लोगों पर इसका असर पड़ सकता है।
रूस से तेल खरीदने पर अमेरिका की नजर
अमेरिका चाहता है कि रूस की कमाई कम हो, ताकि यूक्रेन युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता पर दबाव पड़े। रूस तेल और गैस बेचकर बड़ी कमाई करता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदता है, क्योंकि कई बार वहां से तेल सस्ती कीमत पर मिलता है। अमेरिका इसी खरीद को लेकर भारत समेत दूसरे देशों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
100% टैरिफ लगा तो क्या होगा?
अगर अमेरिका भारतीय सामान पर 100% टैरिफ लगाता है, तो वहां भारतीय उत्पादों की कीमत बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए, भारत से भेजे गए 100 डॉलर के सामान पर 100 डॉलर का टैरिफ लगने पर आयातक की लागत 200 डॉलर हो सकती है। ऐसे में अमेरिकी खरीदार भारतीय सामान खरीदने के बजाय दूसरे देशों का रुख कर सकते हैं। हालांकि, अंतिम कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि टैरिफ का बोझ कारोबारी, सप्लायर और ग्राहक किस तरह बांटते हैं।
इन उद्योगों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
अमेरिका भारत के लिए बड़ा निर्यात बाजार है। कपड़ा, जूते, चमड़े के उत्पाद, कालीन, हीरे-जवाहरात और समुद्री उत्पादों जैसे कारोबार पर टैरिफ बढ़ने का दबाव पड़ सकता है। अगर अमेरिकी कंपनियां भारतीय सामान के ऑर्डर कम करती हैं, तो कारोबारियों की कमाई प्रभावित हो सकती है। उत्पादन घटने पर नई भर्तियां रुकने और कुछ कर्मचारियों की नौकरियों पर खतरा पैदा होने की आशंका भी बढ़ सकती है।
आम आदमी की जेब पर कैसे पड़ेगा असर?
टैरिफ बढ़ने का असर सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रह सकता। निर्यात घटने से कुछ उद्योगों में रोजगार और कर्मचारियों की आय प्रभावित हो सकती है। व्यापारिक तनाव बढ़ने पर रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है, हालांकि इसकी कई दूसरी वजहें भी होती हैं। अगर रुपया कमजोर होता है, तो कच्चे तेल और दूसरे आयातित सामान की लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर कुछ उत्पादों की कीमतों पर दिख सकता है, लेकिन महंगाई बढ़ना तय नहीं है।
पहले भी बढ़ चुका है भारतीय सामान पर टैरिफ
साल 2025 में अमेरिका ने भारत के कई उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। उस समय कुछ भारतीय निर्यात क्षेत्रों पर दबाव देखने को मिला। हालांकि, इसका असर हर उद्योग पर एक जैसा नहीं पड़ा था। अगर इस बार टैरिफ 100% तक पहुंचता है, तो अमेरिकी बाजार पर निर्भर भारतीय कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
अब ट्रंप के फैसले पर टिकी नजरें
आगे तीन संभावनाएं हैं। अमेरिका भारत पर ज्यादा टैरिफ लगा सकता है, कुछ उत्पादों को छूट दे सकता है या दोनों देश बातचीत से कोई समझौता कर सकते हैं। टैरिफ का इस्तेमाल व्यापारिक बातचीत में दबाव बनाने के लिए भी किया जा सकता है। फिलहाल किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अगले कुछ दिनों में अमेरिकी सरकार की आधिकारिक घोषणा और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर नजर रखना जरूरी होगा।