UP Panchayat Election: हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, तीन महीने में होंगे पंचायत चुनाव, प्रधानों के प्रशासक बने रहने पर भी आया अहम फैसला

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य में तीन महीने के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। साथ ही, फिलहाल निवर्तमान ग्राम प्रधान अगले तीन महीने तक प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे। इस फैसले से पंचायत चुनाव की तैयारियों में तेजी आने की उम्मीद है। चुनाव में देरी और प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में 11 याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

दो जजों की बेंच ने सुनाया फैसला

हाईकोर्ट की जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। पंचायत चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई 8 अक्टूबर को पूरी हुई थी, जिसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इन याचिकाओं में समय पर चुनाव कराने और कार्यकाल खत्म होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अब कोर्ट ने तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है।

OBC आयोग का काम जारी रहेगा

अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग आयोग यानी OBC आयोग अपना काम जारी रखेगा, लेकिन पंचायत चुनाव की प्रक्रिया उसके काम पर निर्भर नहीं होगी। चुनाव मौजूदा नियमों और व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे। साथ ही, आरक्षण से जुड़े प्रावधानों का पालन भी करना होगा। फैसले के अनुसार, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में आयोग के काम को बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। इससे चुनाव की तैयारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई है।

योगी सरकार के फैसले को दी गई थी चुनौती

उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 मई को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का फैसला लिया था। इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कुल 11 याचिकाओं में छह जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं। याचिकाकर्ताओं ने समय पर चुनाव नहीं कराने पर सवाल उठाए थे। मामले में राज्य सरकार और पंचायत विभाग के अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था। अदालत ने सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़कर सुनवाई की।

OBC आयोग की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल

पंचायत चुनाव के मामले में पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट भी सुनवाई का अहम हिस्सा रही। 9 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिपोर्ट तैयार करने के तरीके पर सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि रिपोर्ट क्षेत्र में जाकर जांच करने के बजाय कार्यालय में बैठकर तैयार की गई प्रतीत होती है। आयोग की ओर से हलफनामा भी दाखिल किया गया था, जिसे अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया। अब कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को आयोग के काम से अलग रखते हुए आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।

कांग्रेस ने फैसले को बताया लोकतंत्र की जीत

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए कहा कि पंचायत व्यवस्था संविधान और ग्रामीण समाज की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार तीन महीने के भीतर चुनाव कराएगी। अब सरकार और संबंधित विभागों के सामने निर्धारित समय में चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती होगी। इस फैसले के बाद प्रदेश की ग्राम पंचायतों में चुनावी गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

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Author: The Hindi Post