उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अमेठी और रायबरेली में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गांधी परिवार से जुड़े इन दोनों क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपनी ताकत दिखाने में जुटी हैं। पहले अखिलेश यादव ने रायबरेली में बड़ा आयोजन किया, फिर भाजपा ने अमेठी में शक्ति प्रदर्शन किया। दोनों आयोजनों का मकसद अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना और आगामी चुनाव के लिए माहौल बनाना है।
अमेठी में भाजपा ने दिखाई ताकत
14 अक्टूबर को अमेठी में भाजपा ने सपा के तीन विधायकों को पार्टी में शामिल कराया। इनमें राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। इस मौके पर भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और कई मंत्री मौजूद रहे। बड़े नेताओं की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं की भीड़ के जरिए भाजपा ने संदेश देने की कोशिश की कि 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद भी अमेठी उसकी प्राथमिकता बना हुआ है।
स्मृति ईरानी की नजर 2027 पर
2024 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी को अमेठी से हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने उन्हें हराया था। अब भाजपा स्मृति की सक्रियता के जरिए क्षेत्र में संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। स्मृति ने अमेठी को अपना घर बताते हुए कहा कि वह यहां के लोगों से जुड़ी रहेंगी। उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि कुछ नेता चुनाव के समय आते हैं और बाद में गायब हो जाते हैं।
रायबरेली में अखिलेश का शक्ति प्रदर्शन
भाजपा के आयोजन से पहले 25 सितंबर को अखिलेश यादव ने रायबरेली में सपा के चुनावी अभियान की शुरुआत की थी। रायबरेली राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है और 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस का समर्थन किया था। हालांकि, विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच सीटों की दावेदारी का सवाल अहम है। अखिलेश का आयोजन सपा की संगठनात्मक ताकत दिखाने के साथ यह संदेश भी माना जा रहा है कि सीटों का बंटवारा जीतने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की मुश्किलें
अमेठी और रायबरेली में गांधी परिवार का प्रभाव लंबे समय से रहा है, लेकिन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा है। 2022 में रायबरेली की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर सपा और एक पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। अमेठी की पांच सीटों में भाजपा ने तीन और सपा ने दो सीटें जीती थीं। यानी इन दोनों क्षेत्रों की कुल दस विधानसभा सीटों में कांग्रेस कोई सीट नहीं जीत सकी। लोकसभा चुनाव में सहयोग मिलने के बावजूद विधानसभा में कांग्रेस को सपा से मुकाबला करना पड़ सकता है।
भाजपा और सपा की तैयारी, कांग्रेस के सामने चुनौती
2027 के चुनाव से पहले भाजपा अमेठी में अपना प्रभाव फिर मजबूत करना चाहती है, जबकि सपा रायबरेली में अपनी ताकत दिखाकर सीटों के बंटवारे में मजबूत स्थिति हासिल करना चाहती है। कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि गांधी परिवार से जुड़ाव को विधानसभा स्तर पर मजबूत संगठन और जीत में कैसे बदला जाए। ऐसे में अमेठी और रायबरेली की राजनीतिक गतिविधियां केवल दो क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये उत्तर प्रदेश में भाजपा, सपा और कांग्रेस के बीच आगामी चुनावी मुकाबले की दिशा भी दिखाती हैं।