UP Elections से पहले राज्यपालों की नियुक्ति से गरमाई सियासत, दलित-OBC चेहरों को जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने क्या दिया संदेश?

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपालों की नई नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। नई नियुक्तियों में दलित, ओबीसी और दूसरे सामाजिक वर्गों से जुड़े नेताओं को संवैधानिक पदों की जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम को सिक्किम, वरिष्ठ नेता बृजमोहन राम को ओडिशा, सुधा यादव को कर्नाटक और ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया है। इन नियुक्तियों को सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संदेश, दोनों नजरियों से देखा जा रहा है।

दलित समुदाय से आने वाले नेताओं को मिली जिम्मेदारी

नई नियुक्तियों में दुष्यंत गौतम और बृजमोहन राम के नाम खास चर्चा में हैं। दुष्यंत गौतम जाटव समुदाय से आते हैं और बीजेपी में दलित राजनीति से जुड़े प्रमुख नेताओं में गिने जाते रहे हैं। उन्हें सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है। वहीं, झारखंड के वरिष्ठ नेता बृजमोहन राम को ओडिशा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह धोबी समुदाय से आते हैं और पलामू क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह 1998 और 1999 में लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने थे। इन नियुक्तियों को दलित समुदायों के प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी देखा जा रहा है।

सुधा यादव की नियुक्ति से ओबीसी प्रतिनिधित्व पर चर्चा

हरियाणा से जुड़ी बीजेपी नेता सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया है। वह यादव समुदाय से आती हैं और बीजेपी संसदीय बोर्ड की सदस्य रही हैं। उत्तर प्रदेश में यादव मतदाता समाजवादी पार्टी का महत्वपूर्ण सामाजिक आधार माने जाते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति को ओबीसी प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, किसी नेता को राज्यपाल बनाए जाने से चुनाव में मतदाताओं के रुझान पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड की जिम्मेदारी

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह राजपूत समुदाय से आते हैं और राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं। इन चार नियुक्तियों में अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है। राजनीतिक जानकारों के नजरिए से ऐसी नियुक्तियों को सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ जोड़कर देखा जा सकता है। हालांकि, इन फैसलों के पीछे चुनावी रणनीति होने का दावा आधिकारिक पुष्टि के बिना निश्चित रूप से नहीं किया जा सकता।

दूसरे राज्यों के राज्यपालों की जिम्मेदारियां भी बदलीं

नई नियुक्तियों के साथ कुछ मौजूदा राज्यपालों के प्रभार में भी बदलाव किया गया है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु भेजा गया है, जबकि सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राष्ट्रपति भवन की ओर से 12 अक्टूबर को जारी विज्ञप्ति में इन बदलावों की जानकारी दी गई थी। इससे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था।

यूपी चुनाव में जातीय समीकरण क्यों हैं अहम?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। दलित मतदाताओं के बीच बहुजन समाज पार्टी का पारंपरिक आधार रहा है, जबकि यादव समुदाय समाजवादी पार्टी का प्रमुख सामाजिक आधार माना जाता है। बीजेपी भी गैर-यादव ओबीसी और दलित समुदायों के बीच अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश करती रही है। ऐसे में राज्यपालों की नई नियुक्तियों को राजनीतिक संदेश के नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, इन नियुक्तियों का आगामी चुनाव पर कितना असर होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट हो सकेगा।

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Author: The Hindi Post