उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी और RSS ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। दोनों संगठनों के बीच लगातार समन्वय बैठकें हो रही हैं, जिनमें चुनावी रणनीति के साथ संगठन की स्थिति पर भी चर्चा हो रही है। हाल की बैठकों में कार्यकर्ताओं की नाराजगी और उनकी शिकायतों का मुद्दा भी सामने आया। संगठन का संदेश है कि फिलहाल पूरा ध्यान चुनावी तैयारी और संगठन को मजबूत करने पर रखा जाए।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी बनी मुद्दा
सुल्तानपुर की समन्वय बैठक से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ कार्यकर्ताओं ने सरकार के विभिन्न निकायों और संस्थाओं में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने की शिकायत की। स्थानीय निकायों में नामांकन को लेकर देरी की बात भी सामने आई। हालांकि, संगठन की ओर से फिलहाल इन मतभेदों को पीछे रखते हुए चुनावी तैयारी पर ध्यान देने का संदेश दिया गया है।
80 हजार बैठकों का बनाया गया प्लान
बीजेपी और RSS ने चुनाव से पहले समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बढ़ाने के लिए ‘सर्व समाज बैठक’ पर जोर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 80 हजार बैठकें कराने की योजना है। इसके जरिए करीब 42-43 बिरादरियों तक संगठन की सीधी पहुंच बनाने की कोशिश होगी। बीजेपी शक्ति केंद्र स्तर पर भी अलग-अलग सामाजिक समूहों के साथ बैठकें करेगी।
शहरों में ड्राइंग रूम बैठकें होंगी
ग्रामीण इलाकों के साथ शहरी क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहरों में सर्व समाज बैठकों को ‘ड्राइंग रूम बैठक’ का नाम दिया गया है। वहीं ‘ग्रामोदय से बूथोदय’ जैसी रणनीति के जरिए गांव से लेकर बूथ तक संगठन को सक्रिय करने की तैयारी है। अगले कुछ महीनों में कार्यकर्ताओं और वैचारिक संगठनों को जमीन पर ज्यादा सक्रिय करने की योजना बताई गई है।
गांव-गांव जाकर वोटरों से संपर्क
‘जन-स्पर्श’ और ‘ग्राम-स्पर्श’ जैसे अभियानों के जरिए आम लोगों, लाभार्थियों और कमजोर वर्गों से सीधा संपर्क बनाने पर जोर रहेगा। साथ ही पारंपरिक समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी सुनने की कोशिश होगी। ‘जन-जागरण’ अभियान के जरिए सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की रणनीति भी बनाई गई है।
बूथ स्तर पर होगी रियल टाइम निगरानी
संगठन-संवाद अभियान के जरिए कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और विधायकों के बीच तालमेल बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही बूथ और शक्ति केंद्र स्तर की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था पर जोर है। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाट्सऐप ग्रुप और पार्टी के ऐप के जरिए गतिविधियों को ट्रैक किया जाएगा, जिसकी निगरानी जिला स्तर से लेकर लखनऊ के वार रूम तक की जाएगी।