Office में दोस्ती अच्छी, लेकिन प्राइवेसी भी जरूरी, सहकर्मियों के साथ भूलकर भी शेयर न करें ये 5 बातें, वरना करियर पर पड़ सकता है भारी असर

ऑफिस में हम रोज करीब 8 से 9 घंटे बिताते हैं। ऐसे में सहकर्मियों के साथ दोस्ती होना स्वाभाविक है। कई बार दोस्ती इतनी बढ़ जाती है कि हम अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी बातें भी शेयर करने लगते हैं। हालांकि प्रोफेशनल लाइफ में हर बात बताना सही नहीं होता। जरूरत से ज्यादा जानकारी देना बाद में आपके लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। इसलिए ऑफिस में रिश्ते अच्छे रखें, लेकिन अपनी निजी जानकारी को लेकर थोड़ी सावधानी जरूर बरतें।

पर्सनल परेशानियां हर किसी से शेयर न करें

ऑफिस में अपनी फैमिली की समस्याएं, रिश्तों की परेशानी, कर्ज या आर्थिक स्थिति जैसी बातें हर किसी को बताने से बचें। इसी तरह गंभीर स्वास्थ्य समस्या या निजी रिश्तों से जुड़ी जानकारी भी सोच-समझकर ही साझा करें। हो सकता है सामने वाला आपका भरोसेमंद दोस्त हो, लेकिन हर सहकर्मी आपकी निजी बातों को उसी तरह नहीं रखेगा। ऐसी जानकारी कभी-कभी ऑफिस में चर्चा या मजाक का विषय भी बन सकती है और आपकी प्रोफेशनल इमेज प्रभावित हो सकती है।

करियर से जुड़े प्लान अपने तक रखें

आप कब नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, कहीं इंटरव्यू दिया है या किसी दूसरी कंपनी में आपका चयन हो सकता है, ऐसी बातें ऑफिस में हर किसी को बताने से बचें। इसी तरह भविष्य में मिलने वाले बड़े प्रोजेक्ट या प्रमोशन की उम्मीद को भी पहले से शेयर करना जरूरी नहीं है। जब तक कोई फैसला आधिकारिक न हो, तब तक उसे निजी रखना बेहतर है। इससे अनावश्यक चर्चा और गलतफहमी से बचा जा सकता है।

अपने काम के शॉर्टकट सबको न बताएं

ऑफिस में काम जल्दी और बेहतर तरीके से पूरा करने के लिए हर व्यक्ति अपना तरीका विकसित करता है। अगर आपने कोई स्मार्ट तरीका या शॉर्टकट खोजा है, तो उसे हर सहकर्मी के साथ तुरंत शेयर करना जरूरी नहीं है। कई बार आपकी बताई जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है या आपके काम को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। इसलिए जरूरी प्रोसेस और कंपनी के नियमों का पालन करते हुए अपने काम की जानकारी सोच-समझकर साझा करें।

घर की बिल्कुल सही लोकेशन बताने से बचें

ऑफिस में सहकर्मियों को आपके इलाके या शहर के बारे में पता होना सामान्य बात है, लेकिन घर का बिल्कुल सटीक पता या लोकेशन हर किसी से साझा करना जरूरी नहीं है। निजी सुरक्षा और प्राइवेसी के लिहाज से इस जानकारी को सीमित रखना बेहतर है। खासकर ऐसे लोगों के साथ, जिनसे आपकी ज्यादा करीबी नहीं है। जरूरत पड़ने पर केवल उतनी ही जानकारी दें, जितनी वास्तव में जरूरी हो।

सैलरी और इंसेंटिव की रकम न बताएं

सैलरी, बोनस और इंसेंटिव आपकी निजी प्रोफेशनल जानकारी है। इसलिए इसकी बिल्कुल सही रकम हर सहकर्मी के साथ साझा करने से बचना समझदारी है। अलग-अलग कर्मचारियों की भूमिका, अनुभव और जिम्मेदारियों के हिसाब से वेतन अलग हो सकता है, जिससे अनावश्यक तुलना और तनाव पैदा हो सकता है। बेहतर है कि पैसों से जुड़ी निजी जानकारी को सीमित रखें और ऑफिस में अपनी बातचीत को प्रोफेशनल बनाए रखें।

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Author: The Hindi Post