UP Police पर हाईकोर्ट की सख्ती, हिरासत से गिरफ्तारी तक कई मामलों में सवाल, लाखों रुपये मुआवजे और हर्जाने के आदेश

जनवरी से सितंबर 2026 के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से जुड़े कई मामले पहुंचे। इनमें गिरफ्तारी, हिरासत, रिहाई में देरी और कोर्ट के आदेशों का पालन न करने जैसे मुद्दे शामिल थे। कई मामलों में कोर्ट ने मुआवजा या हर्जाना देने के आदेश दिए और कुछ मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

कमलेश कुमार को पांच दिन हिरासत में रखा

सितंबर के एक मामले में हाईकोर्ट ने कमलेश कुमार को 15 से 19 अगस्त तक पुलिस हिरासत में रखने को लेकर सवाल उठाए। रिकॉर्ड में उनकी गिरफ्तारी 19 अगस्त को दिखाई गई थी। कोर्ट के सामने पुलिस अधिकारियों ने अपनी गलती मानी। इसके बाद अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को कमलेश को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

कई मामलों में गिरफ्तारी पर उठे सवाल

फरवरी में सुनील कांडू की 2017 की गिरफ्तारी के मामले में कोर्ट ने सरकार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। मार्च में सचिन आर्य की रिहाई में करीब 20 घंटे की देरी पर भी अदालत ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इन मामलों में कोर्ट ने गिरफ्तारी और रिहाई से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया के पालन पर जोर दिया।

कहीं पांच लाख तो कहीं 75 हजार रुपये

29 मई को अनिल सोनी के मामले में हाईकोर्ट ने पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट के मुताबिक उनकी गिरफ्तारी उस समय हुई, जब अंतरिम आदेश गिरफ्तारी पर रोक लगा रहा था। जून में चंदर पाल सिंह को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखने पर 75 हजार और मंसूर अहमद को आठ दिन की कथित गैरकानूनी हिरासत के लिए दो लाख रुपये देने का आदेश हुआ।

10 लाख का आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

मनोज कुमार के मामले में हाईकोर्ट ने तीन महीने से ज्यादा हिरासत और गिरफ्तारी के लिखित कारण नहीं बताए जाने को लेकर 10 लाख रुपये की exemplary costs का आदेश दिया था। हालांकि, जून में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की अपील पर इस भुगतान वाले आदेश पर रोक लगा दी। इसलिए इस रकम को दिए जा चुके मुआवजे के तौर पर नहीं गिना जा सकता। जुलाई में यासीन मामले में जानकारी देने में देरी पर सरकार पर 50 हजार रुपये की कॉस्ट भी लगी।

वाहन जब्ती और CCTV पर भी सवाल

अगस्त में विनोद कुमार सिंह के वाहन की कथित गैरकानूनी जब्ती के मामले में हाईकोर्ट ने वाहन की रिहाई तक 20 हजार रुपये प्रति माह मुआवजा देने का आदेश दिया। मानसिक और आर्थिक नुकसान के लिए 25 हजार रुपये अतिरिक्त भी दिए जाने को कहा गया। सितंबर में देवरिया के चार लोगों की कथित हिरासत के मामले में कुल 65 हजार रुपये मुआवजा और पुलिस स्टेशन का CCTV फुटेज नहीं मिलने पर अधिकारियों से जवाब मांगा गया। वहीं, अभिषेक त्यागी पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई रद्द करते हुए कोर्ट ने 50 हजार रुपये damages देने का आदेश दिया।

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Author: The Hindi Post