Health Tips: पेट की चर्बी से थकान तक, शरीर में दिखें ये संकेत तो समझें मेटाबॉलिक सिंड्रोम का बढ़ रहा है खतरा

मेटाबॉलिक सिंड्रोम कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में कई समस्याओं का एक साथ होना है। डॉक्टरों के मुताबिक, जब पेट के आसपास ज्यादा चर्बी, ब्लड शुगर बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ना या गुड कोलेस्ट्रॉल कम होना जैसी दिक्कतें एक साथ होने लगें, तो इसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम कहा जाता है। इनमें कम से कम तीन समस्याएं मौजूद होना महत्वपूर्ण माना जाता है।

बिगड़ी लाइफस्टाइल हो सकती है वजह

खराब खानपान, कम शारीरिक गतिविधि और बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल मेटाबॉलिक सिंड्रोम के खतरे को बढ़ा सकती है। खासतौर पर पेट के आसपास लगातार बढ़ती चर्बी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ी हो सकती है। इसमें शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता और धीरे-धीरे ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या सामने आ सकती है।

ज्यादा प्यास और बार-बार पेशाब

मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ी कुछ समस्याओं के संकेत शरीर में दिखाई दे सकते हैं। बहुत ज्यादा प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना बढ़े हुए ब्लड शुगर से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना भी एक संकेत हो सकता है। हालांकि, इन लक्षणों के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर मेटाबॉलिक सिंड्रोम मान लेना सही नहीं है।

धुंधली नजर और त्वचा में बदलाव

ब्लड शुगर बढ़ने पर कुछ लोगों को कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई दे सकता है। वहीं गर्दन या बगल की त्वचा का काला और मोटा होना भी ध्यान देने वाला संकेत है। इसे एकैंथोसिस निग्रिकन्स कहा जाता है और यह अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा होता है। ऐसे बदलाव नजर आने पर डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर रहता है।

कई बार कोई लक्षण नहीं दिखता

मेटाबॉलिक सिंड्रोम की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इससे जुड़ी कई स्थितियों में कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते। हाई ब्लड प्रेशर, बढ़े हुए ट्राइग्लिसराइड्स या कम गुड कोलेस्ट्रॉल का पता अक्सर जांच के बाद ही चलता है। व्यक्ति खुद को पूरी तरह ठीक महसूस कर सकता है, लेकिन रिपोर्ट में परेशानी सामने आ सकती है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण है।

समय पर जांच से घट सकता है खतरा

अगर पेट के आसपास ज्यादा चर्बी है या पहले से ब्लड प्रेशर और शुगर की समस्या है, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और कमर का माप जरूरी जानकारी दे सकते हैं। समय पर पहचान होने पर डॉक्टर की सलाह के मुताबिक बेहतर डाइट, नियमित एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर इलाज के जरिए आगे होने वाली डायबिटीज, दिल की बीमारी और स्ट्रोक के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

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Author: The Hindi Post