उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी करीब छह महीने बाकी हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, सपा कांग्रेस को करीब 60 से 70 सीटें देने के विकल्प पर विचार कर रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस करीब 105 सीटों की मांग कर रही है। ऐसे में गठबंधन के भीतर सीट बंटवारा बड़ा मुद्दा बन सकता है।
सपा हर सीट का कर रही आकलन
सपा की टीम हर जिले और संभावित सीट का अलग-अलग हिसाब तैयार कर रही है। इसमें जातीय समीकरण, पार्टी का संगठन, पिछले चुनाव का प्रदर्शन और संभावित उम्मीदवार की पकड़ देखी जा रही है। पार्टी यह भी समझने की कोशिश कर रही है कि किस सीट पर कांग्रेस गठबंधन के लिए जीत का मजबूत विकल्प बन सकती है। इसी आधार पर सीटों का शुरुआती खाका तैयार किया जा रहा है।
अखिलेश का फोकस जीतने वाली सीटों पर
सपा की रणनीति में सिर्फ सीटों की संख्या के बजाय जीत की संभावना को ज्यादा महत्व दिया जा सकता है। अखिलेश यादव पहले भी गठबंधन में इस तरह की सोच के संकेत देते रहे हैं। ऐसे में सपा का तर्क हो सकता है कि किसी सीट पर कांग्रेस पहले चुनाव लड़ चुकी है, सिर्फ इस वजह से उसका दावा मजबूत नहीं हो जाता। मौजूदा समय में संगठन और जीत की क्षमता भी देखी जाएगी।
कांग्रेस से मांगे गए संभावित उम्मीदवार
सूत्रों के अनुसार, सपा ने कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों की जानकारी भी मांगी है। यानी कांग्रेस को सिर्फ सीटों की सूची नहीं देनी होगी, बल्कि यह भी बताना होगा कि वहां उसका मजबूत चेहरा कौन है। स्थानीय संगठन, पुराने कार्यकर्ताओं की सक्रियता और पारंपरिक वोट बैंक जैसे मुद्दे भी बातचीत में अहम रहेंगे। इससे सीटों का बंटवारा काफी रणनीतिक हो सकता है।
अमेठी-रायबरेली समेत इन सीटों पर नजर
सीट बंटवारे में अमेठी और रायबरेली सबसे ज्यादा चर्चा में रह सकते हैं। कांग्रेस इन क्षेत्रों को अपनी पुरानी राजनीतिक पहचान से जोड़कर देखती है। हालांकि 2022 में कांग्रेस इन दोनों जिलों में एक भी विधानसभा सीट नहीं जीत सकी थी, जबकि सपा ने रायबरेली की चार और अमेठी की दो सीटें जीती थीं। इसके अलावा लखनऊ, कानपुर, मेरठ, आगरा, वाराणसी और प्रयागराज जैसी शहरी-अर्धशहरी सीटों पर भी चर्चा हो सकती है।
2017 का आंकड़ा कांग्रेस के सामने चुनौती
कांग्रेस 2017 के सपा-कांग्रेस गठबंधन का उदाहरण देते हुए करीब 105 सीटों का दावा कर रही है। उस चुनाव में कांग्रेस को 105 सीटें मिली थीं, लेकिन पार्टी सिर्फ सात सीटें जीत पाई थी। यही आंकड़ा सपा के लिए कांग्रेस की मौजूदा मांग पर सवाल उठाने का आधार बन सकता है। अब देखना होगा कि बातचीत में कांग्रेस 105 सीटों पर अड़ेगी या 60-70 सीटों के सपा प्रस्ताव के बीच कोई समझौता निकलता है।