भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस साल 14 सितंबर, सोमवार को घर-घर में गणपति स्थापना के साथ गणेशोत्सव शुरू हुआ है। बप्पा की स्थापना के बाद भक्त उनकी विधि-विधान से पूजा करते हैं। इसके बाद सबसे बड़ा सवाल होता है कि गणेश जी की प्रतिमा का विसर्जन कितने दिन बाद करना शुभ माना जाता है।
श्रद्धा के अनुसार तय होता है विसर्जन
गणपति विसर्जन के लिए कोई एक ही दिन जरूरी नहीं माना जाता। भक्त अपनी श्रद्धा, परिवार की परंपरा, संकल्प और सुविधा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिन तक बप्पा को घर में रख सकते हैं। कई परिवारों में वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार ही विसर्जन का दिन तय होता है। इन सभी दिनों में पूरे भक्तिभाव से पूजा और आरती की जाती है।
डेढ़ दिन में भी पूरा होता है उत्सव
जो भक्त कम समय में गणेशोत्सव मनाते हैं, वे डेढ़ दिन बाद गणपति विसर्जन करते हैं। इसमें स्थापना के अगले दिन दोपहर बाद विधि-विधान से बप्पा को विदाई दी जाती है। कम समय के बावजूद भक्त पूरे मन से पूजा-पाठ करते हैं। मान्यता है कि उत्सव की अवधि छोटी होने से भक्ति और श्रद्धा का महत्व कम नहीं होता। इसलिए डेढ़ दिन का गणेशोत्सव भी शुभ माना जाता है।
तीन, पांच और सात दिन क्यों खास हैं?
कई परिवारों में गणपति को तीन, पांच या सात दिनों के लिए घर लाने की परंपरा है। विषम संख्या वाले इन दिनों को शुभ माना जाता है। कुछ भक्त मन्नत या संकल्प के अनुसार पांच या सात दिन तक बप्पा की सेवा करते हैं। इस दौरान सुबह-शाम पूजा और आरती होती है। तय दिन पूरा होने पर सम्मान और श्रद्धा के साथ गणपति का विसर्जन किया जाता है।
अनंत चतुर्दशी पर होता है मुख्य विसर्जन
अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन का सबसे प्रमुख दिन माना जाता है। चतुर्थी से शुरू होने वाला दस दिवसीय गणेशोत्सव इसी दिन पूरा होता है। इस दौरान भक्त लगातार बप्पा की पूजा करते हैं और अंतिम दिन धूमधाम से उन्हें विदाई देते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन गणपति की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं और अगले साल फिर आने की प्रार्थना करते हैं।
बप्पा को विदाई देने का क्या संदेश है?
गणेश विसर्जन सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा अवसर भी है। मान्यता है कि बप्पा अपने साथ भक्तों के दुख, परेशानियां और विघ्न लेकर जाते हैं। जल में प्रतिमा का विलीन होना जीवन में परिवर्तन और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसलिए चाहे डेढ़ दिन में विसर्जन हो या दसवें दिन, सबसे जरूरी है कि बप्पा को पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ विदाई दी जाए।