इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत करीब 109 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से दुनियाभर में महंगाई का डर बढ़ गया है। महंगे तेल से आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। ऐसे में अमेरिका के फेडरल रिजर्व समेत दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दरों को लेकर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर दिखाई दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना हुआ कमजोर
न्यूयॉर्क के कॉमेक्स बाजार में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। शाम करीब 5:55 बजे गोल्ड फ्यूचर लगभग 82 डॉलर की गिरावट के साथ 4,327 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं गोल्ड स्पॉट करीब 52.70 डॉलर टूटकर 4,296.38 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी दबाव में रही और फ्यूचर करीब 3 फीसदी गिरकर 63.37 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
एमसीएक्स पर सोने की कीमत गिरी
भारत में भी सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर सोना 2,313 रुपये यानी करीब 1.51 फीसदी गिरकर 1,50,471 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। पिछले कारोबारी दिन सोना 1,52,784 रुपये पर बंद हुआ था। यानी कुछ ही समय में कीमतों में बड़ी कमजोरी देखने को मिली है।
चांदी में भी तेज गिरावट जारी
चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले और ज्यादा दबाव देखने को मिला। एमसीएक्स पर चांदी करीब 5,055 रुपये यानी 2.15 फीसदी टूटकर 2,29,919 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले कारोबारी दिन इसका भाव 2,34,974 रुपये था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी करीब 3 फीसदी कमजोर रही। इससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
ब्याज दरों का डर बना सबसे बड़ा कारण
महंगाई बढ़ने पर केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में सोने जैसी ऐसी संपत्तियां, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता, निवेशकों को कम आकर्षक लग सकती हैं। अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ाई है। साथ ही मिडिल ईस्ट में तनाव और तेल की सप्लाई से जुड़ा जोखिम महंगाई को और ऊपर ले जा सकता है।
आगे और गिर सकते हैं सोना-चांदी?
जानकारों के मुताबिक अगर महंगाई लगातार ऊंची रहती है और फेडरल रिजर्व समेत दूसरे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को बढ़ाने या सख्त रखने का फैसला करते हैं, तो सोने-चांदी पर दबाव बढ़ सकता है। भारत में भी थोक और खुदरा महंगाई में तेजी ने आरबीआई के सामने चुनौती बढ़ाई है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।